केदारनाथ यात्रा के दौरान पशु क्रूरता के कई मामले सामने आ रहे हैं. इन दिनों वहां एक खच्चर को कथित तौर पर सिगरेट पिलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. हालांकि केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़े-खच्चर के मालिकों ने इसकी सच्चाई भी बताई है.
घोड़ा-खच्चर मालिकों का कहना है कि खच्चर को सिगरेट नहीं पिलाई जा रही थी, बल्कि उसे धुंआ दिया जा रहा था. इस धुंए से घोड़े-खच्चर की तबियत ठीक रहती है. पशु मालिकों के मुताबिक घोड़े-खच्चर को पेट दर्द की बीमारी होती है, इस धुंए से वह बीमारी दूर होती है.
वीडियो में देखा जा सकता है कि घोड़ा-खच्चर संचालक जबरन घोड़े को सिगरेट जैसा कोई पदार्थ पिला रहे हैं और इससे धुंआ भी उड़ रहा है. इस वीडियो को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं और इसे पशुओं के साथ क्रूरता के तौर पर देखा जा रहा है.
जब इसकी पड़ताल की गई तो गौरीकुंड में घोड़े-खच्चर मालिकों का इसके बारे में कुछ और ही कहना था. घोड़े-खच्चर मालिकों का कहना था कि खच्चर को किसी भी प्रकार की सिगरेट नहीं पिलाई जा रही है. जो धुंआ खच्चर को दिया जा रहा है, वो सदियों पुराना घरेलू नुस्खा है.
पहाड़ कें घरेलू नुस्खे सें किया जा रहा था घोंडे का इलाज
घोड़ा खच्चर संचालकों का कहना हैँ कि पहाड़ी इलाके में अक्सर घोड़े-खच्चर के पेट में अचानक दर्द उठ जाता है. जब डॉक्टर की दवाइयां भी काम नहीं आती है तो घोड़े-खच्चर को टाट से बने बोरे का धुंआ दिया जाता है.
इस धुंए को देने के बाद कुछ हद तक घोड़़ा-खच्चर स्वस्थ हो जाता है. इस प्रकार का घरेलू उपाय सदियों से किया जा रहा है. घोड़े-खच्चर की मौत अक्सर पेट में गैस बनने से होती है, जिसके बाद उसे ठीक करने के लिए यह धुंआ दिया जाता है.
इस धुंए के कारण घोड़े-खच्चर के पेट में बनी गैस बाहर निकलती है और वह स्वस्थ होता है. पशु मालिकों ने कहा, ‘कुछ लोग यहां आकर यात्रा और यहां के लोगों को बदनाम कर रहे हैं.’ घोड़ा-खच्चर मालिकों ने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान घोड़े-खच्चर सामान के अलावा यात्रियों को भी ढोते हैं.
पशुपालन विभाग कें डाक्टरों का हैँ अपना तर्क
पैदल यात्रा मार्ग की स्थिति सही नहीं होती है और कई बार घोड़े-खच्चर चोटिल हो जाते हैं, जिससे उन्हें चलने में दिक्कतें होती हैं. ऐसे में इसको पशु क्रूरता की नजर से नहीं देखना चाहिए. वहीं रुद्रप्रयाग के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी अशोक पंवार का कहना है इस प्रकार के कृत्य पशु क्रूरता में आते हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.





