नोएडा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो ई-रिक्शा से 45 लाख रुपये कैश लेकर जा रहा था. पुलिस को उसके पास से पांच फर्जी आधार कार्ड भी मिले हैं. उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया है.एक रिपोर्ट के मुताबिक अतिरिक्त डीसीपी (नोएडा) शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि आरोपी व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल एक गिरोह का हिस्सा है. यह गिरोह ब्लैक मनी को व्हाइट करता है. एक गुप्त सूचना के बाद बुधवार को सेक्टर-113 पुलिस थाने के अफसरों ने अरेस्ट किया. पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि इस पैसे को देकर 2000 रुपये के नोट बदले जाने थे.
2000 रुपये के बदलने थे नोट
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक थाना सेक्टर 113 के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार की देर रात को तलाशी के दौरान एक ई-रिक्शा से 500 रुपये के नोट के 45 लाख रुपये बरामद किए गए थे. उन्होंने बताया कि मेरठ निवासी 40 वर्षीय जगजीवन उर्फ बाबू से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि इस पैसे को तीन लोगों ने उसे दिया था. उन्होंने बताया कि आयकर विभाग को इसकी सूचना दी गई है.
हवाला का काम करता है आरोपी
जांच में यह बात सामने आई कि ये लोग हवाला का कारोबार करते हैं. उन्होंने बताया कि पुलिस रैकेट में शामिल गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए काम कर रही है. इस मामले में जगजीवन के अलावा जितेंद्र, राहुल और सरदारजी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
छह धाराओं में केस, जेल भेजा गया
स्थानीय पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 419 (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (दस्तावेज का धोखाधड़ीपूर्ण उपयोग) और के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस ने कहा कि 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोपी को अदालत ने जेल भेज दिया है.





