उत्तराखंड
कोटद्वार में पिछले कुछ समय से सक्रिय चंदन तस्करों नें पुलिस और वन विभाग की रातों की नींद हराम कर दी हैँ. कोटद्वार के मवाकोट स्थित जगदेव बाबा मंदिर परिसर और शहर के बीचों-बीच सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस से हरे चंदन के पेड़ों पर आरियां चला कर तस्कर उन्हें चोरी कर अपने साथ लें गए हैँ.हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ हैँ ज़ब तस्करों नें हरें चंदन के पेड़ों कों अपना निशाना बनाया हों इससे पहले भी पिछले कुछ सालों में तस्कर शिब्बूनगर, शिवपुर और मवाकोट से दर्जनों चंदन के पेड़ों कों काट कर उनकी तस्करी कर चुके हैँ. लेकिन हर बार की तरह इस बार भी पुलिस और वन विभाग के हाथ अभी तक खाली ही हैँ.इस बार 7 दिसंबर की रात कों चंदन तस्करों नें पुलिस और वन विभाग कों फिर खुली चुनौती देतें हुए हरे चंदन के पेड़ों पर हाथ साफ कर दिए लेकिन पुलिस और वन विभाग की टीमें तब से लेकर अभी तक सीसीटीवी खगांलने में ही जुटी हैँ.
शातिर किस्म हैँ कुख्यात चंदन तस्कर
कोटद्वार में जितनी भी जगहों पर चंदन तस्करी के मामलें प्रकाश में आए हैँ वहां तस्करों नें इस घटना कों देर रात कों ही अंजाम दिया हैँ. इससे एक बात तों साफ हों गई कि यह किसी आम आदमी का काम नहीं बल्कि कुख्यात तस्करों का ही काम हैँ जिन्हें कोटद्वार के चप्पे-चप्पे की जानकारी हैँ कि कहां-कहां सीसीटीवी कैमरें लगें हैँ और कौन सा रास्ता किस गली से होकर मेन सड़क तक पहुँचता हैँ, ताकि भागने में भी आसानी हों. यह कुख्यात चंदन तस्कर इतने शातिर हैँ कि एक दो जगहों पर जहां सीसीटीवी में ये कैद भी हुए तों इनकी शक्ल वहाँ साफ नजर नहीं आई . गिरोह बनाकर काम करने वालें इन तस्करों की संख्या 7 से 8 के बीच बताई जा रहीं हैँ.इनमें से कुछ तस्कर चंदन के पेड़ों कों काटने का काम करतें हैँ जबकि कुछ सड़कों और गलियों पर नजर बनाएं रखते हैँ ताकि जरा भी क़ोई आहट सुनाई दें तों सबको समय पर अलर्ट किया जा सकें.
कोटद्वार के चंदन तस्करी के बाहरी राज्यों के तस्करों से जुड़े हैँ तार
अंतराष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिबंधित चंदन की लकड़ी की अच्छी खासी कीमत होंने के कारण इसकी अक्सर तस्करी की जाती हैँ. पिछले माह पडोसी राज्य उत्तरप्रदेश के कन्नौज में पुलिस द्वारा गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के डुंडवाबुजुर्ग गांव में एक घर में तस्करी कर लाई गई चंदन की लकड़ी रखे होने की सूचना पर छापेमारी की गई थी,छापेमारी के दौरान पुलिस को शान मोहम्मद के घर पर छह बोरों में 256.260 किलोग्राम चंदन की लकड़ी रखी मिली. जिसकी बाजार में करीब 15 लाख रुपए कीमत आकी गई है. पुलिस ने अंतर्राज्यीय चंदन तस्कर गिरोह के सदस्य शान मोहम्मद, उसके भाई जुनैद उर्फ मोना और फराहान को गिरफ्तार कर लिया.इतना ही नहीं कन्नौज की ही सदर कोतवाली पुलिस द्वारा इसी माह 4 दिसंबर कों काजीटोला मोहल्ला में सरायमीरा-कन्नौज मार्ग पर घेराबंदी कर एक लोडर की तलाशी के दौरान 3 क्विंटल 91 किलोग्राम चंदन की प्रतिबंधित लकड़ी बरामद की गई जिसकी कीमत बाजार में 20 लाख रुपये बताई गई.इस दौरान लोडर में सवार कागजियाना मोहल्ला निवासी आसिफ, चौधरी सराय निवासी रवि, शेखाना मोहल्ला निवासी साकिब और पनियारेपुर्वा जसौली निवासी राकेश कुमार को दबोच लिया गया.
चंदन तस्करों से ज़ब सख़्ती से पूछताछ की गई तों उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में इत्र के करोबारियों कों वह लकड़ी बेच दिया करतें थे.
पिछले 2 माह के भीतर कन्नौज पुलिस की इस कार्यवाही से साफ हों गया कि प्रतिबंधित चंदन की लकड़ी का कारोबार कई राज्यों में फैला हैँ और कारोबारी से लेकर तस्कर तक इसमें शामिल हैँ.
कोटद्वार में पिछले कुछ समय से चंदन तस्करी की घटनाओं से एक बात तों साफ हैँ कि किसी बाहरी बड़े माफिया के इशारे पर ही कोटद्वार में लगातार चंदन के पेड़ कटते रहें हैँ.लेकिन आज तक किसी भी चंदन तस्कर का पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ना अपने आप में कई सवाल खड़े करता हैँ.
चंदन तस्करों की धरपकड़ के लिए पुलिस और वन विभाग नें झोंकी इस बार ताकत
शहर के भीड़ भाड़ वालें इलाके से चंदन चोरी की घटनाओं नें पुलिस की रात्रि गश्त पर भी सवाल खड़े किए हैँ. दरसअल कोतवाली से चंद कदमों की दूरी पर सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस से तस्कर चंदन के पेड़ काटकर लें गए जबकि पड़ोस में ही पूर्व विधायक स्व.संतन बर्थवाल के आवास के बाहर खड़े चंदन के तीन पेड़ों पर भी तस्करों नें आरियां चला दी,लेकिन पुलिस कों इसकी कानों कान भनक तक नहीं लगी.कोटद्वार में चंदन के पेड़ों की चोरी की बढ़ती घटनाओं कों देखते हुए इस पूरे मामलें कों खुद जिले की कप्तान श्वेता चौबे नें गंभीरता से लिया और तत्काल इसके खुलासे के निर्देश अधीनस्थों कों जारी किए.चंदन तस्करों की धरपकड़ के लिए एसओजी के साथ साथ पुलिस के मुखबीर तंत्र कों भी इस काम में लगाया गया, ताकि जल्द तस्करों कों सलाखों के पीछे भेजा जा सकें.उधर दूसरी ओर लैंसडाउन डिवीजन भी अपने स्तर पर चंदन तस्करों तक पहुंचने में लगा हैँ.





