उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर क्रैश होने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है.रविवार को उत्तराखंड के केदार घाटी में एक और हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया,जिसमे सात लोगों की मौत हो गई. चार धाम की शुरुआत से लेकर अब तक यह पांचवी हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना है. जिनमें से दो चॉपर क्रैश हुए और 3 की इमरजेंसी लैंडिंग हुई , इस वर्ष हेलीकॉप्टर में अब तक 13 लोगों की जान चली गई है.
केदारघाटी में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश हादसे में 7 लोगों की मौत ने सबको झकझोर करके रख दिया है.डीजीसीए ने मामले की जांच शुरू कर दी है.फिलहाल सोमवार तक हेलीकॉप्टर की सभी शटल सेवा बंद रखी गई थी,जिसके बाद इन्हे फिर शुरू कर दिया है.इधर केदारनाथ यात्रा में बीते तीन वर्ष में आर्यन हेली एविएशन का दूसरा हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ है. इससे पूर्व 18 अक्तूबर 2022 को केदारनाथ से गुप्तकाशी के लिए टेकऑफ किया था और गरुडचट्टी के समीप क्रैश हो गया था। इस हादसे में भी पायलट सहित सात लोगों की मौत हो गई थी.
इस वर्ष चार धाम यात्रा में तीन हादसों में इमरजेंसी लैंडिंग और दो हेलीकॉटर क्रैश हादसे हुए है. केदारनाथ धाम में अब तक हेली कंपनियों द्वारा 9 हज़ार 800 शटल सेवा दी जा चुकी है.जिसमें 60 हज़ार लोगों को सेवा दी गई है. वही चारधाम में चार्टड सर्विसेज में 2705 हेली सेवा में 15 हजार लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाया गया है. पर्यटन विभाग के सचिव सचिन कुर्वे ने कहा अनप्रेडिकटेबल मौसम फैक्टर को लेकर उड़ान के वक्त आने वाले समय में बेहतर सुधार किए जाएंगे। वही उन्होंने कहा चारधाम में हेलीकॉप्टर की सेवा सबसे सुरक्षित यात्रा करने का साधन है.
उधर हेलीकॉप्टर क्रैश के ताजा मामले में फाटा के राजस्व उप निरीक्षक के द्वारा दर्ज मुकदमे में शिकायत दी गई है कि डीजीसीए के एडवाइजरी के अनुसार चार धाम यात्रा में हेलीकॉप्टर कंपनी द्वारा sop का पालन नहीं की जा रही है.लेकिन पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे का कहना है कि डीजीसीए के एडवाइजरी का पालन किया जा रहा है.नियम ना मानने वाले पायलट का लाइसेंस रद्द किया जा रहा है.वही सर्विलांस कैमरे की मदद से भी एस.ओ.पी.का पालन कराया जा रहा है.
हेलीकॉप्टर क्रैश की लगातार हो रही घटनाओं के बाद CM धामी उच्चस्तरीय बैठक कर चुके है और चार धाम में सेवा दे रहे हेलीकॉप्टरो के संचालन और एविएशन कंपनीयों को लेकर ठोस नीति बनाने के निर्देश दे चुके है जिससे राज्य में चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को अत्यधिक सुरक्षित बनाया जा सके।.लेकिन सवाल यह है कि कब तक सरकार कोई ठोस नीति लाएगी और क्या डीजीसीए इस मामले की जांच के बाद पहाड़ों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी करेंगी.





