उत्तराखंड के जनपद उत्तरकाशी के धराली आपदा के चश्मदीद व्यास सैनी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए एक बात ऐसी कह दी जिसकी अब चारों ओर चर्चा हों रहीं है.बीती 5 अगस्त के दिन जितने भी लोग धराली में मौजूद थे, सबकी अपनी-अपनी अलग कहानी है. कुछ कहानी आज मलबे में दफन हो गई, लेकिन जो लोग बच गए, उनकी बातें अगर सुनी जाए तो उसमें उस लम्हें में क्या कुछ घटा था, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसे ही कहानी है धराली में मिस्त्री और ठेकेदारी का काम करने वाले बिहार बेतिया के व्यास सैनी की.
व्यास सैनी बताते हैं कि वो उस दिन धराली में थे. उनके बेहद करीबी राजेश पंवार जो कि फौजी हैं, वो अभी-अभी रिटायर हुए थे, उनके यहां रिटायरमेंट की पार्टी थी. दोपहर करीब 1 बजे के करीब का समय रहा होगा, उस वक्त बारिश हो रही थी.
उन्होंने बताया कि ऐसे में बहुत सारे नेपाली मजदूर और बिहार की लेबर उस दिन छुट्टी पर थे. सभी अपने-अपने कमरों में थे. तभी अचानक सैलाब आ गया. ऐसे में उन लोगों को अपने कमरे से बाहर निकलने का भी मौका नहीं मिल पाया. स्थानीय लोग जितने अपने घरों में थे और होटल में जो टूरिस्ट ठहरे थे, वो सब अपने ही कमरों में दब गए. यह सब उनकी आंखों के सामने हुआ
आपदा के समय धराली में थे व्यास सैनी: व्यास सैनी बताते हैं कि उस दिन वो बिल्कुल वहीं जहां पर आज मलबा है, वहीं पर थे. बस थोड़ा सा आगे एक चाय की दुकान पर चाय पी रहे थे. हमारा चाय पीने के बाद फिर से वापस मार्केट की तरफ जाने का प्लान था, लेकिन तब तक सामने मुखबा वालों ने जोर-जोर से सीटियां बजानी शुरू कर दी.
उन्होंने कहा कि जिन लोगों की भी जान इस हादसे में बच पाई है, वो केवल मुखबा वालों की वजह से ही बच पाई है, नहीं तो कोई भी नहीं बच पाता. उन्होंने बताया कि जब यह हादसा हुआ तो हादसे पहले बहुत जोर की आवाज आई. जैसे कोई बम ब्लास्ट हो गया हो. जो आदमी वहां पर आसपास मौजूद था. किसी को भगाने का मौका नहीं मिल पाया, लेकिन अगर कोई बच पाया है तो उसके पीछे मुखबा वालों ने जो सीटियां मारी, वही एक वजह हैं.
सीटी बजाकर आगाह करते हैं मुखबा और धराली के लोग: व्यास सैनी बताते हैं कि पहाड़ों में लोग इस तरह से मदद करते हैं, जब धराली के ऊपर कोई समस्या होती है तो मुखबा वाले सिटी मारते हैं और जब मुखबा के ऊपर कोई खतरा आता है तो धराली वाले सीटी मारते हैं. इस तरह से पूरे पहाड़ों पर आमने-सामने से यह मदद करने का तरीका है, लेकिन इतनी मदद के बावजूद भी काफी ज्यादा लोग वहां मलबा के नीचे दबे हुए हैं और यह सब उनकी मौजूदगी में हुआ.
मुझे शराब न पीने के फैसले ने बचाया: व्यास सैनी बताते हैं कि वो लंबे समय से धराली में काम कर रहे हैं. उनके काफी दोस्त वहां पर बन गए हैं. जिस तरह से अगले दिन मेला था और उनके करीबी के घर पर भी रिटायरमेंट का फंक्शन था. ऐसे में उनके दोस्तों ने पार्टी में शामिल होने का आग्रह किया. साथ ही दोस्तों ने उन्हें शराब पीने के लिए भी कहा.
जिस पर व्यास सैनी ने जवाब दिया कि वो आजकल नहीं पी रहे हैं. उन्होंने दोस्तों से कहा ‘मैंने शराब छोड़ रखी है और मैं यह सब नहीं करूंगा.’ बस उसके बाद वो वहां से थोड़ी दूर चाय की दुकान पर चाय ही पी रहे थे कि तभी सामने से सीटियों की आवाज आने लगी. उसके बाद का खौफनाक मंजर कुछ ही सैकड़ों में उनके आंखों के सामने घट गई.
एक कार वाले ने गाड़ी भगाकर बचाई अपनी जान: धराली आपदा के प्रत्यक्षदर्शी व्यास सैनी बताते हैं कि जो लोग उस समय ऊपर की तरफ भागे, उनके बचने की संभावना थी, लेकिन जो लोग नीचे थे, उनमें से कोई भी नहीं बच पाया. वहां सड़क पर गाड़ियां भी चल रही थी, लेकिन कोई नहीं बच पाया. केवल एक कार वाले ने गाड़ी भगाई और वो बच गया. उसका नाम फुरकान अहमद था.
वो गाड़ी वाला इसलिए बचा क्योंकि, जब सामने मुखबा से सीटियां बजी तो सारे स्थानीय लोग ‘भागो भागो’ चिल्लाने लगे. तब उसने अपनी गाड़ी भगाई और उस हादसे में केवल एक ही वो गाड़ी वाला बचा. उसकी ड्राइविंग भी अच्छी थी और उसने अपनी गाड़ी खूब भगाई, तभी जाकर फुरकान अहमद बच पाया, नहीं तो वो भी नहीं बच पाता.
फुटबॉल की तरह हवा में उड़ी स्कूटी: इस कार के पीछे एक स्कूटी भी थी, लेकिन वो फुटबॉल की तरह हवा में उछल गई और स्कूटी चलाने वाले को भी ये समझ नहीं आया कि आखिर हो क्या गया है. लोग भाग रहे थे, कुछ कीचड़ में भी भाग रहे थे, लेकिन उनका कोई फायदा नहीं हुआ, उनके ऊपर से और मलबा आ गिरा, जिसके बाद वो खामोश हो गए.
हादसे के तुरंत बाद पहुंच गई थी आर्मी, कीचड़ में जाना था मुश्किल: व्यास सैनी बताते हैं कि जैसी ही हादसा हुआ, उसके तुरंत बाद आर्मी वहां पर पहुंच गई थी. स्थानीय पुलिस भी बाद में आ गई थी, लेकिन मंजर ऐसा था कि उस समय कोई कुछ नहीं कर सकता था. आर्मी वालों ने दलदल में जाने की बहुत कोशिश की, ताकि किसी की भी जान बचा सके, लेकिन उस समय दलदल में जाने लायक स्थिति नहीं थी.
एक शख्स बलविंदर सिंह जिसका वीडियो भी सामने आया था, वो पहले दलदल में था, लेकिन अचानक से दलदल ने उसे ऊपर उठा दिया और वो बाहर निकलने लगा, फिर वो कीचड़ में डूबा, फिर उसके बाद वो बड़ी हिम्मत करके उठा. तब तक कीचड़ ने अपनी दिशा बदल दी थी और फिर वो बच पाया. नहीं तो अगर कीचड़ और उसके ऊपर आता तो वो भी दब जाता. इसके बाद उसका रेस्क्यू किया गया.
धराली में घर के घर भागीरथी में बहने लगे: धराली हादसे के प्रत्यक्षदर्शी व्यास सैनी बताते हैं कि धराली में आए सैलाब में इतनी ताकत थी कि उसने पूरे के पूरा घर को खिसका दिया. उन्होंने बताया कि उनके जानकार बॉबी पंवार का घर नाले के उस पार था. पहले उनके घर का मुंह हमारी तरफ था और पता नहीं चला कि कैसे इस घर का मुंह सामने मुखबा की तरफ हो गया.
धीरे-धीरे दलदल इस पूरे घर को भागीरथी नदी (गंगा) में ले गया. ऐसा लग रहा था उनका पूरा मकान होटल नदी में तैर रहा है, लेकिन वो वहां कीचड़ में फंसा हुआ है. अब हालात ये है कि यह घर आज कीचड़ में खिसकते-खिसकते मुखबा के किनारे पहुंच गया है.
पुराने धराली कों पहचान पाना नहीं है अब आसान : उन्होंने बताया कि आज भी धारली मार्केट में कीचड़ 40 फीट से ऊपर है. जब यह हादसा हुआ तो पहले बड़े-बड़े पत्थर आए, उसके बाद कीचड़ आया. इसने सब कुछ लील कर रख दिया. उन्होंने बताया कि वो राजमिस्त्री के साथ ठेकेदार हैं. उन्हें सड़क आदि का काफी अनुभव है.
अपने अनुभव के आधार पर प्रत्यक्षदर्शी व्यास सैनी ने कहा कि जहां पर धराली में पहले सड़क थी, वहां पर सड़क बन पाना बहुत ही मुश्किल काम है. उन्होंने साफ तौर से कहा कि वहां पर सड़क नहीं बनाई जा सकती है. इसके लिए कुछ और अल्टरनेटिव सरकार को ढूंढना होगा.
मार्केट के मंदिर में चल रहा था कीर्तन, महिलाओं का लगा था जमावड़ा: धराली घटना के प्रत्यक्षदर्शी व्यास सैनी बताते हैं कि जब यह घटना हुई, तब बाजार में खूब चहल-पहल थी. मार्केट में एक मंदिर था, जिसमें कीर्तन चल रहा था. इस कीर्तन में बहुत सारी लोकल महिलाएं और कुछ यात्री भी थीं. हमारे आंखों के सामने वहां पर कीर्तन और आरतियां चल रही थी. वो भी इस हादसे में दब गईं. तकरीबन 10 से 15 महिलाएं रही होंगी. इसके अलावा धराली आपदा से एक दिन पहले कल्प केदार में रिनोवेशन का भी काम चल रहा था.





