उत्तराखंड
जनपद उत्तरकाशी के धराली आपदा प्रभावित क्षेत्र में SDRF, NDRF, ITBP एवं अन्य राहत-बचाव एजेंसियों की टीमें सेक्टरवार विभाजित क्षेत्रों में सघन सर्च एवं रेस्क्यू अभियान संचालित कर रही हैं.SDRF द्वारा अपने आवंटित सेक्टर में टीम बनाकर ड्रोन, डॉग स्क्वॉड, एरिया सर्च, पायनियरी उपकरणों तथा उन्नत तकनीकी साधनों का प्रयोग करते हुए ध्वस्त भवनों में सर्चिंग की जा रही हैं.SDRF के IG अरुण मोहन जोशी खुद ग्राउंड ज़ीरो पर उतरकर आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत बचाव कार्य में जूटे हुए है.धराली और हर्षिल क्षेत्र में आई दैविय आपदा की खबर मिलते ही तत्काल अरुण मोहन जोशी मौक़े पर पहुंच गए थे,और उन्होंने बिना समय गवाए जल्द सें जल्द राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया था.उत्तराखंड पुलिस के ईमानदार और तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों में गिने जानें वाले अरुण मोहन जोशी की जहां भी पोस्टिंग रहीं उन्होंने अपनी कार्यशैली सें ऐसी छाप छोड़ी है,जिसकी जनता तों कायल रहीं ही है साथ ही पुलिस महकमा भी उन पर गर्व करता है. धराली और हर्षिल क्षेत्र में आई दैविय आपदा में राहत और बचाव कार्य की इस बार उन्हें जों जिम्मेदारी सौंपी गईं है उस पर भी वह खरा उतरने के लिए अपनी टीम के साथ जीजान सें रात दिन जुटे हुए है .2006 बैच के IPS अधिकारी अरुण मोहन जोशी चाहते तों देहरादून में बैठकर ही धराली और हर्षिल क्षेत्र में आई दैविय आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी कर सकतें थे,लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और खुद सबसे पहलें मौक़े पर पहुंचकर ना केवल इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली बल्कि अपने जवानों के जोश और जज्बे कों भी गति प्रदान की.SDRF के IG अरुण मोहन जोशी नें अपनी टीम के साथ पहले चरण में 1200 सें अधिक लोगों कों आपदाग्रस्त इलाकों सें बाहर निकाल कर उनकों पहले हेली सेवाओं के जरिए सुरक्षित स्थानों पर भेजा और अब दूसरे चरण में आपदा में लापता हुए लोगों की मलबे में तलाश कर रहें है.
मलबे में शवों कों तलाशने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों का किया जा रहा है प्रयोग
SDRF के IG अरुण मोहन जोशी नें जानकारी देतें हुए बताया कि धराली आपदा में लापता हुए लोगों कों तलाशना एक बड़ा चैलेन्ज है क्योँकि वहां पर लाखों टन मलबा जमा है.उन्होंने कहा कि फिर भी SDRF की टीम अत्याधुनिक उपकरणों के साथ सर्च अभियान में जुटी हुईं है. अरुण मोहन जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि धराली में लापता हुए लोगों कों तलाशने के लिए इस बार मलबे में थर्मल इमेजिंग कैमरा और विक्टिम लोकेशन कैमरा की मदद ली जा रहीं है.विक्टिम लोकेटिंग कैमरें में एक लंबी छड़ होती है जिसके किनारे पर कैमरा लगा होता है जो किसी संकरी जगह पर भेजा जाता है और वहाँ सें यह डिस्प्ले पर तस्वीर भेजता है.साथ ही अरुण मोहन जोशी नें जानकारी देतें हुए बताया कि एसडीआरएफ भी अपने खोजी कुत्तों की मदद भी इस अभियान में लें रहीं है





