न जॉब न इनकम…नेपाल में हिंसा के पीछे बेरोजगारी बड़ी वजह

नई दिल्ली: हमारे पड़ोसी देश नेपाल में हिंसा जारी है.यह हिंसा सोशल मीडिया पर बैन लगाने के कारण हुई थी. नेपाल की सरकार ने 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगाया था जिसमें फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब आदि शामिल थे. इसके बाद सोमवार को नेपाल में युवाओं (खासकर जेन-जी) की हिंसा भड़क उठी. इसमें कई लोगों की मौत भी हुई है. वहीं दूसरी ओर नेपाल में बेरोजगारी को लेकर भी युवाओं में गुस्सा है.हालांकि बाद में नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बैन हटा दिया, लेकिन हिंसा अभी भी जारी है.

नेपाल में है भ्रष्टाचार चरम पर 

नेपाल के युवा सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ आवाज उठा रहे थे.इनमें जेन-जी (1995 से 2010 के बीच जन्मे लोग) की संख्या ज्यादा थी.इस पीढ़ी के युवा सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. वहीं ये सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे थे.वहीं दूसरी ओर नेपाल में बेरोजगारी दर भी लगातार बढ़ रही है. इससे भी नेपाल की युवा पीढ़ी काफी परेशान है.ऐसे में इन युवाओं का गुस्सा सरकार के खिलाफ फूट पड़ा.

कितनी है नेपाल में जेन-जी की आबादी?

नेपाल जेन-जी (Gen Z) के लिए एक खास देश बन गया है. इसका कारण यहां इस पीढ़ी के युवाओं की संख्या है.16 से 25 साल के युवा जेन-जी में आते हैं.नेपाल में जेन-जी कुल आबादी का करीब 21% हैं. यह संख्या करीब 3 करोड़ है. इसमें से करीब 90% युवा इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं.

युवाओं को नहीं मिल रहा काम

आमतौर पर माना जाता है कि 4 से 6% बेरोजगारी दर सामान्य है.अगर बेरोजगारी 6% से ज्यादा हो जाए तो ये अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है. नेपाल में बेरोजगारी दर 10% से ज्यादा है. नेपाल में बेरोजगारी दर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहुत से युवाओं को उनकी क्षमता के हिसाब से काम नहीं मिल रहा है. नई जॉब में लगातार कमी आ रही है.नेपाल में हर साल 5 लाख से ज्यादा युवा नौकरी की तलाश में आते हैं

युवाओं के लिए ज्यादा चुनौती

पिछले साल नेपाल के नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस ने एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट का नाम ‘नेपाल लिविंग स्टैंडर्ड सर्वे’ है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 24 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर 1995-96 में 7.3% थी.2022-23 में यह बढ़कर 22.7% हो गई है.रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल में युवाओं के लिए नौकरी ढूंढना एक बड़ी चुनौती है.

जानकारों के अनुसार नेपाल सरकार नौकरियां पैदा करने में विफल रही है. ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ सालों में निवेश का माहौल अनुकूल नहीं रहा है.इसका मुख्य कारण राजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितता है.जब निवेश नहीं होगा, तो नौकरियां पैदा नहीं होंगी.

वहीं दूसरी ओर कई उद्योग, सेवा क्षेत्र और कंपनियां अभी भी आर्थिक मंदी के कारण कर्मचारियों को निकाल रही हैं.देश में श्रम की मांग कम है क्योंकि प्रमुख आर्थिक क्षेत्र (कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग) मंदी का सामना कर रहे हैं.

नेपाल में लोगों की कितनी कमाई?

प्रति व्यक्ति कमाई के मामले में भी नेपाल के लोगों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के मुताबिक नेपाल की साल 2025 में नॉमिनल प्रति व्यक्ति आय 1404 डॉलर (करीब 1.23 लाख रुपये) है. वहीं इसकी भारत से तुलना करें तो यह काफी कम है.भारत की नॉमिनल प्रति व्यक्ति आय 2878 डॉलर (करीब 2.54 लाख रुपये) है.यानी नेपाल की प्रति व्यक्ति आय भारत के मुकाबले आधी से भी कम है.

जीडीपी में तेजी

वहीं बात अगर नेपाल की जीडीपी की करें तो इसमें तेजी आ रही है।.वर्ल्ड बैंक के अनुसार साल 2024 में नेपाल की जीडीपी 42.91 अरब डॉलर थी. वहीं इससे एक साल पहले यानी 2023 में यह 41.05 अरब डॉलर थी. हालांकि इससे एक साल पहले यानी 2022 में यह 41.18 अरब डॉलर थी.यानी साल 2023 में साल 2022 के मुकाबले इसमें गिरावट आई है.