उत्तराखंड में शीतकालीन चार धाम यात्रा कों सफल बनाने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रहीं है.श्री बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी नें जानकारी देतें हुए बताया कि शीतकालीन चार धाम यात्रा कों लेकर कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री नें एक बैठक ली है जिसमें उन्होंने कहा कि शीतकालीन चार धाम यात्रा के लिए सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली गईं थी.हेमंत द्विवेदी नें कहा कि श्री बदरी केदार मंदिर समिति नें भी अपने स्तर पर यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली थी,उन्होने कहा कि चार धाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी से जुड़ी यात्रा भी है.उन्होंने कहा कि तीर्थ श्रद्धालु वर्षभर चारों धामों के दर्शन कर सकें इसके लिए एक दशक पहले उत्तराखंड में शीतकालीन चार धाम यात्रा की शुरूआत की गईं थी,जिसके सुखद परिणाम देखने कों मिल रहें है.BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी नें कहा कि शीतकालीन चार धाम यात्रा उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की गई थी.इन सभी शीतकालीन धामों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खुले हुए है. जिससे चार धाम यात्रा साल भर चलती रहेगी.
चार धामों के शीतकालीन गद्दी स्थल
श्री बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी नें कहा कि चारों धामों यमुनात्री , गंगोत्री , केदारनाथ और बद्रीनाथ के देवी-देवताओं को शीत ऋतु के छह महीनों के लिए क्रमशः खरसाली, मुखवा, उखीमठ और योगध्यान बद्री मंदिर (पांडुकेश्वर) में तीर्थ श्रद्धालु दर्शन कर रहें है.उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से, चार धामों की तीर्थयात्रा मई में शुरू होती है और सर्दियों की शुरुआत के साथ अक्टूबर-नवम्बर में समाप्त होती है. सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण तीर्थस्थल पर पहुंचना मुश्किल हो जाता हैं, इसलिए चारों धामों की मूर्तियों और प्रतीकों को उनके शीतकालीन गद्दी स्थल लाया जाता है,जहाँ उनकी विधि विधान के साथ पूजा अर्चना होती है.






