उत्तराखंड में भाजपा के इंटर्नल सर्वे से उड़ी विधायकों और मंत्रियों की नींद,कोर ग्रुप की बैठक में होगा बड़ा फैसला

उत्तराखंड में इन दिनों भाजपा के इंटरनल सर्वे को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. कई पैरामीटर पर विधायकों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं तो वहीं आने वाली आज होने जा रही कोर ग्रुप की बैठक पर सबकी नजरें लगी हुई हैं.

बीजेपी के इन्टरनल सर्वे से विधायकों में हड़कंप

उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों भाजपा के इंटरनल सर्वे की बहुत ज़्यादा चर्चा की जा रही है. उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी के इंटरनल सर्वे की चर्चा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है. पार्टी ने कई अलग-अलग पैरामीटर पर यह सर्वे किया है और इस सर्वे के आधार पर सभी विधायकों को तीन अलग-अलग जोन में रखा गया है. इसमें से सबसे खतरनाक रेड जोन है. यानी कि जो विधायक रेड जोन में हैं, उनकी सीट पर खतरा मंडरा रहा है. साफ है कि उस सीट पर ग्राउंड से फीडबैक सर्वे रिपोर्ट में ठीक नहीं हैं और अगले चुनावों में विधायक जी का टिकट कटना तय है.

वरिष्ठ पत्रकार क्या कहते हैं: वरिष्ठ पत्रकार सुभाष नौटियाल बताते हैं कि-

राजनीति में एक बुनियादी सिद्धांत है कि पार्टी अपनी जीत को मद्देनजर रखते हुए सारे फैसले लेती है. वहीं भाजपा का अपना एक सेट पैटर्न है. पार्टी का संगठनात्मक ढांचा है जो कि बहुत बड़ा है और ग्रास रूट तक फैला है. पार्टी की अपनी कुछ व्यवस्थाएं हैं, जिन पर वह अपने नेताओं को परखती है और उसी हिसाब से चुनाव में जाने का फैसला लेती है.

पहाड़ी नेताओं ने मैदान में पलायन किया

उत्तराखड के चुनावी इतिहास में यहां के बहुत सारे नेताओं ने पहाड़ से मैदान में पलायन किया है. पहाड़ों की विधानसभा सीट छोड़कर उन्होंने मैदान में अपनी सीट तलाशी है और अपना राजनीतिक भविष्य देखा है. यही वजह है कि यह पैटर्न भाजपा के विधायकों में भी देखने को मिल रहा है और ज्यादातर विधायक पहाड़ों की विधानसभा सीटों को छोड़कर मैदान में अपने लिए एक सुरक्षित सीट तलाश रहे हैं.

नए राष्ट्रीय अध्यक्ष से उदाहरण पेश करने की कोशिश

वहीं इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी में जिस तरह से केंद्र में देखने को मिला है कि पार्टी ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में एक युवा नेता को आगे बढ़ाया है इससे यह संदेश देने की कोशिश की है कि युवाओं को बढ़ावा दिया है. यह दिखाता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में एज फैक्टर भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.

प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की यह दूसरे टर्म की सरकार है और इस तरह से लगातार पिछले 10 सालों से भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड में सरकार है. ऐसे में सरकार विरोधी रुझान (एंटी इनकंबेंसी) भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होता है. उसके प्रभाव को किस तरह से न्यूट्रलाइज किया जाना है. वहीं भारतीय जनता पार्टी अपने प्रयोगों के लिए पहचानी जाती है. तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि इस बार भारतीय जनता पार्टी कुछ अलग तरह का प्रयोग कर सकती है.

मंत्री विधायक अपनी विधानसभा सीट पर फोकस करें- भट्ट

उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के इंटरनल सर्वे और सामने आ रही विधायकों की रिपोर्ट को लेकर जब पार्टी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से पूछा गया तो उनका कहना है कि-

निश्चित रूप से पार्टी का यह लक्ष्य रहता है कि हर मंत्री विधायक अपनी विधानसभा सीट पर फोकस करे. पिछले दिनों इस तरह की चर्चाएं हो रही थी तो पार्टी ने इस संबंध में स्पष्ट तौर पर संदेश दिया है कि विधायक अपनी विधानसभा सीट पर अपना ध्यान केंद्रित करें. जितना समय बचा हुआ है उस समय में अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों के काम करवाएं. पार्टी का सर्वे एक पार्टी की परंपरा और पद्धति का हिस्सा है. दो सर्वे केंद्र द्वारा किए जाएंगे और प्रदेश स्तर पर भी एक सर्वे करवाया जा चुका है और एक और करवाया जाएगा.