मीडिल ईस्ट में छिड़ी जंग से गहराया कई देशों में तेल और गैस का संकट,PM मोदी ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग

ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की भीषण जंग ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा रखा है.ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत उनके कई नेताओं और सीनियर डिप्लोमेट्स को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त एयर स्ट्राइक में मारे जाने के बाद से ही ईरानी सेना बौखलाई हुई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसे बेशक बड़ी कामयाबी बताया, लेकिन ईरानी सेना की स्पेशल फोर्स IRGC आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए कूद पड़ी है. खाड़ी में सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन (Saudi Arabia, UAE, Qatar, Kuwait, Bahrain and Jordan) समेत जिन-जिन देशों में US मिलिट्री बेस मौजूद हैं ईरान उन देशों पर अपनी बैलेस्टिक मिसाइलों और घातक ड्रोन्स से ताबड़तोड़ हमले कर रहा है. ईरानी मिसाइलों के धमाकों ने इन मुस्लिम देशों के शेखों का पारा चढ़ा दिया है, उस ओर से इसका बहुत बुरा खामियाजा भुगतने की चेतावनी दी गई है. हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं, खतरा इन देशों के Oil Reservoir या तेल उत्पादन भंडार केंद्रों पर मंडराने लगा है.सऊदी अरब के शायबा में मौजूद उसके ऑयल फील्ड पर हमले की एक कोशिश हो चुकी है. जिससे खाड़ी के तमाम तेल उत्पादक देश सहमे हुए हैं और तेल उत्पादन में कटौती का फैसला ले रहे हैं.जिसका असर दुनियाभर के देशों पर पड़ने लगा है.पाकिस्तान के अलावा, इंडोनेशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, पोलैंड, वियेतनाम, फ्रांस (Pakistan, Indonesia, Sri Lanka, Bangladesh, Poland, Vietnam, France).. और 9वां नाम एक ऐसे देश का है जिसे सुनकर आप चौंक सकते हैं.वो 9वां देश खुद अमेरिका है, जिसने ईरान पर हमले की शुरुआत कर दुनिया को इस संकट की ओर धकेल दिया है.मिडिल ईस्ट के हालात को देखते हुए भारत में भी नरेंद्र मोदी सरकार ने तैयारियां शुरु कर दी हैं. यहां भी गैस की किल्लत दिखनी शुरु हो गई है. घरेलू इस्तेमाल वाले LPG गैस सिलेंडर तो फिलहाल मिल रहे हैं, लेकिन
कमर्शियल LPG सिलेंडरों की किल्लत दिखने लगी है.मोदी सरकार ने इससे उपजते हालात को देखते हुए हाई लेवल मीटिंग भी बुलाई और फिलहाल ESMA यानि वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है.