बरेली में 2 फर्जी IAS बहनें गिरफ्तार,खुद कों बताती थी ADM और SDM,नौकरी लगाने के नाम पर लगाया करोड़ों का चूना

उत्तर प्रदेश के बरेली में पकड़ी गई फर्जी IAS अफसर डॉ. विप्रा शर्मा की कहानी बिल्कुल फिल्मी है.प्रयागराज में रहकर उसने करीब 5 साल तक यूपीएससी की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो पाई.मन में अफसर बनने का चाह अधूरी रह गई.

इसके बाद विप्रा ने वही रुतबा और पावर हासिल करने के लिए अपराध का रास्ता चुना.विप्रा ने खुद को IAS अफसर बताना शुरू कर दिया और काले रंग की कार पर नीली बत्ती लगवा दी.

विप्रा ने गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार और SDM लिखवा दिया,फिर अलग-अलग गाड़ियां बदलकर रौब जमाने लगी.सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर कई लोगों से ठगी करने लगी. इस धंधे में उसने अपनी एक सगी और एक ममेरी बहन को भी शामिल कर लिया.

दोस्तों का रुतबा देख विप्रा ने चुना ठगी का रास्ता

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि ग्रेटर ग्रीन पार्क में रहने वाली डॉ. विप्रा शर्मा (35) के साथ यूपीएससी की तैयारी करने वाले कई लोग बड़े पदों पर तैनात हैं.उनकी लाइफस्टाइल और पावर देखकर विप्रा को जलन होती थी.इसीलिए उसने खुद को आईएएस बताना शुरू कर दिया.

एएसपी/सीओ सिटी पंकज श्रीवास्तव कहते हैं– जांच में सामने आया कि यह गिरोह दर्जनों लोगों को ठगी का शिकार बना चुका है.फिलहाल 4 पीड़ितों ने बारादरी थाने में एफआईआर दर्ज कराई है,जिनसे करीब 11 लाख रुपए की ठगी की गई.

हालांकि अंदेशा है कि ठगी का आंकड़ा करोड़ों में हो सकता है,क्योंकि विप्रा के बैंक खाते में ही 55 लाख रुपए मिले, जिन्हें फ्रीज कर दिया गया है.शहर के कई अन्य लोग भी इनके जाल में फंसे हो सकते हैं,जो लोकलाज के डर से सामने नहीं आ रहे.

हायर एजुकेशन के बाद भी चुनी जुर्म की राह

तीनों बहनों का प्रोफाइल किसी को भी हैरान कर सकता है. मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा पीएचडी डिग्री होल्डर है. इंग्लिश और हिस्ट्री में एमए कर चुकी है.उसकी सगी बहन शिखा शर्मा (40) भी एमए पास है.वह भी पूरी साजिश में बराबर शामिल थी.वहीं, ममेरी बहन दीक्षा पाठक (32) बीएससी है,वह पीड़ितों को फंसाने के लिए जाल बुनती थी और फिर लोगों को विप्रा के पास लेकर आती थी.

2016 में पीसीएस प्री क्वालिफाई किया, 2020 में तलाक

पुलिस के मुताबिक, विप्रा शर्मा ने 2016 में पीसीएस प्री क्वालीफाई किया था.इसके बाद उसकी शादी हुई, लेकिन 2020 में तलाक हो गया.इसके बाद उसने फर्जी एडीएम बनने का नाटक शुरू किया.वह बाकायदा गाड़ी पर नीली बत्ती और उत्तर प्रदेश शासन की प्लेट लगाकर चलती थी.

क्राइम सिंडिकेट बनाया, सभी का काम बंटा हुआ था

पुलिस जांच में सामने आया कि लड़कियों ने ऐसा ‘क्राइम सिंडिकेट’ बनाया, जिसमें सभी का काम बंटा हुआ था.दीक्षा शिकार ढूंढती थी, शिखा माहौल बनाती थी और विप्रा फर्जी अधिकारी बनकर ‘फाइनल डील’ करती थी.इनके पास से बरामद महिंद्रा XUV 700 और आईफोन इनकी लग्जरी लाइफ की गवाही दे रहे हैं, जो इन्होंने दूसरों की गाढ़ी कमाई लूटकर बनाई थी.

प्रीति लयल की शिकायत पर खुला राज

ठगी का यह पूरा खेल साल 2022 से शुरू हुआ था.फाइक एन्क्लेव की रहने वाली प्रीति लयल ने पुलिस को बताया कि उसकी मुलाकात दीक्षा पाठक से हुई थी.दीक्षा ने उसे विश्वास दिलाया था कि उसकी बहन डॉ. विप्रा शर्मा बड़ी अधिकारी है.एडीएम के पद पर तैनात है.

दीक्षा ने दावा किया था कि उसकी बहन की ऊंची पहुंच है.वह पैसे के बदले किसी को भी सरकारी नौकरी दिलवा सकती है. इस झांसे में आकर प्रीति के साथ-साथ उसके परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद अली भी नौकरी की उम्मीद में इस जाल में फंस गए.

नकद और बैंक खातों के जरिए वसूले लाखों रुपए

तीनों बहनों ने पीड़ितों को अपने घर बुलाकर उनका भरोसा जीता. जब ये लोग विप्रा शर्मा और शिखा के घर पहुंचे, तो वहां उनके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा भी मौजूद थे.विप्रा शर्मा ने खुद को IAS अधिकारी बताते हुए कहा कि कंप्यूटर ऑपरेटर के पदों पर भर्ती निकली है.वह बड़े अधिकारियों को पैसा देकर उनकी नियुक्ति करवा देगी.इसके बाद पैसों के लेन-देन का सिलसिला शुरू हुआ.

प्रीति ने दो लाख रुपए बैंक खाते में जमा किए.आदिल खान ने एक लाख अस्सी हजार रुपए दिए.मुशाहिद अली ने पांच लाख इक्कीस हजार रुपए की बड़ी रकम विप्रा शर्मा के घर जाकर नकद थमा दी.वहीं संतोष कुमार ने भी दो लाख रुपए का भुगतान किया.

फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर लखनऊ पहुंचे तो खुला मामला

आरोपियों ने पीड़ितों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी थमा दिए.विप्रा शर्मा ने राजस्व परिषद लखनऊ के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए.उन पर तत्कालीन उच्च अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिए.ये नियुक्ति पत्र डाक, वॉट्सएप और ईमेल के जरिए पीड़ितों को भेजे गए.

जब ये लोग जॉइनिंग के लिए लखनऊ पहुंचे, तो वहां के अधिकारियों ने बताया कि ये सभी नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी हैं. इस खुलासे के बाद पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई.उन्हें समझ आया कि वे एक बड़े गिरोह का शिकार हो चुके हैं.

जब पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने उन्हें धमकी दी.पैसा लौटाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ितों ने हिम्मत जुटाकर बारादरी पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई।