सरकारी ज़मीनों पर अवैध कब्जों को लेकर मुख्यमंत्री धामी हुए सख्त,गृह विभाग को दिए यह निर्देश

उत्तराखंड में सरकार भले ही डेढ़ साल से ज्यादा वक्त से अवैध अतिक्रमण के खिलाफ मोर्चा खोले बैठी हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रहीं है.इसी कों देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नें सरकारी विभागों की ढील, लापरवाही और जिम्मेदारी से भागने की आदत कों अपने निशाने पर लिया हैं .सीएम धामी ने अब सभी विभागों से साफ-साफ पूछा है कि “किस विभाग की ज़मीन पर कितना अतिक्रमण हैं और वह कब तक हटेगा.

सरकारी विभागों की ज़मीनों पर अवैध कब्जे कों लेकर सीएम धामी हुए सख्त 

सरकारी जमीनों पर क़ब्ज़ा करने वालों के खिलाफ सरकार ने भले ही तलवार तान रखी हो, लेकिन खुद सरकारी महकमे अब भी अपनी नींद से नहीं जागे हैं.मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई मंचों से ऐलान कर चुके हैं “अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा”, लेकिन उनकी चेतावनियों का असर सरकारी फाइलों से बाहर निकलता नजर नहीं आ रहा.अब तक हाल ये है कि वन विभाग को छोड़कर किसी भी विभाग को ये नहीं पता कि उनकी जमीन कहां और कितनी हथिया ली गई है.सबसे बुरी हालत सिंचाई विभाग का है, जिसकी जमीनों पर लोगों नें सबसे ज्यादा क़ब्ज़े किए हुए है, लेकिन सिचाई विभाग अब तक आंखें मूंदे बैठा है. राजस्व, लोक निर्माण और ऊर्जा विभाग भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं. मुख्यमंत्री ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए सभी विभागों को साफ हिदायत दी है कि “अपनी जमीनों का रिकॉर्ड तैयार करो, अतिक्रमण चिन्हित करो और हटाओ.” ऐसे वक्त में जब सारे विभाग आंकड़ों से भाग रहे हैं, वन विभाग ने मिसाल पेश की है.अब तक प्रदेशभर में करीब 6,000 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण चिन्हित किया गया है, जिसमें से 2,000 हेक्टेयर को मुक्त भी कराया जा चुका है.

CM धामी नें गृह विभाग को दिए निर्देश 

सरकारी विभागों की सुस्ती अब सरकार की सख्ती के सामने टिकने वाली नहीं. मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को सख्त निर्देश दे दिए हैं कि जो नहीं जागेगा, वो अब जवाबदेह होगा. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तगड़ी कार्रवाई के संकेत साफ हैं.अब देखना ये है कि अधिकारी जागते हैं या फिर कार्रवाई की चपेट में आते हैं.