18 वी लोकसभा के लिए देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 102 लोकसभा सीटों के लिए प्रथम चरण में हुए मतदान में उत्तराखंड की भी सभी पांच सीटों पर मतदान शांति पूर्वक सम्पन्न हों चुका है.वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार उत्तराखंड में 2.12 प्रतिशत मतदान कम हुआ है. 2019 में एक ओर जहां 58.01 प्रतिशत मतदान हुआ था तों इस बार घटकर यह 55.89 प्रतिशत पर सिमट गया. बात यदि प्रथम चरण की हाई प्रोफ़ाइल एवं हॉट लोकसभा गढ़वाल की हों तों इस संसदीय क्षेत्र में इस बार मात्र 48.81 प्रतिशत मतदान हुआ जो वर्ष 2019 में हुए 55.17 प्रतिशत मतदान से 6.36 प्रतिशत कम है.
निर्वाचन आयोग और राजनीतिक पार्टियां भी वोटरों कों रिझाने में रहीं नाकाम
निर्वाचन आयोग और राजनीतिक दलों की लाख कोशिशों के बावजूद मत प्रतिशत में वृद्धि नहीं हों सकी.निर्वाचन आयोग द्वारा घर घर जाकर मतदाताओं कों जागरूक करने के साथ हीं नुक्कड़ सभाओं और बैठकों के जरिए भी उन्हें मतदान के लिए जागरूक करने का प्रयास किया गया लेकिन अधिकतर मतदाताओं नें मतदान से अपनें आप कों दूर हीं रखा. उधर दूसरी ओर राजनीतिक दलों द्वारा भी मतदाताओं कों अपने स्टार प्रचारकों के जरिए लुभाने का प्रयास किया गया लेकिन यह कोशिशे भी नाकाफी साबित हुईं.भाजपा द्वारा एक ओर जहां अपने प्रत्याशी अनिल बलूनी के पक्ष में पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी,जनरल बीके सिंह, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ,उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी सहित आधा दर्जन कैबिनेट मंत्रियों कों चुनावी मैदान में उतारा गया तों वहीं कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल के पक्ष में कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गाँधी नें मोर्चा संभाला हुआ था.
शादियों के सीजन और तेज धूप के कारण मतदाताओं नें पोलिंग बूथों से बनाई दूरी
2024 के लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक कम हुए मतदान नें राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं कों दुविधा की स्थिति में डाल दिया है. अब क़ोई भी राजनीतिक दल खुलकर अपनी जीत के दावे नहीं कर रहा है. उधर दूसरी ओर कम मतदान के पीछे जानकारों की यदि मानें तों शादियों का सीजन और तेज धूप भी इसकी एक बड़ी वजह रहीं . दरअसल 17 अप्रैल से लेकर 20 अप्रैल के बीच इतनी शादियां थीं कि मतदाता शादियां अटेंड करता रहा और दूसरा मतदान के दिन अत्यधिक तेज धूप भी कम मतदान की वजह बनी. तेज धूप के कारण मतदाता अपने घरों से मतदाना स्थल पहुंचने में संकोच करता रहा, और इसका असर मत प्रतिशत पर देखने कों मिला.





