पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने उत्तराखंड में छोटी प्रशासनिक इकाईयों की वकालत की हैं.अपने एक निजी दौरे पर कोटद्वार पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने इस दौरान साफ कहा कि जितनी छोटी प्रशासनिक इकाईयां होंगी उसका फायदा उतना आम आदमी कों मिलेगा.उन्होंने कहा कि वह हमेशा से छोटे ज़िलों के पक्षधर रहें हैं.इसलिए आज भी वह छोटी प्रशासनिक इकाईयों की बात करतें हैं.
मुख्यमंत्री रहते रमेश पोखरियाल निशंक ने ही आजादी की 65वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त 2011 में उत्तराखंड में चार नए ज़िलों की घोषणा की थी.
नये जिलों में कोटद्वार को पौड़ी से काटकर, यमुनोत्री को उत्तरकाशी से, डीडीहाट को पिथौरागढ और रानीखेत को अल्मोडा से काटकर बनाया जाना था.लेकिन मुख्यमंत्री पद से हटते ही रमेश पोखरियाल निशंक की इस घोषणा कों उनकी और कांग्रेस की सरकारों में ठंडे बस्ते में डाल दिया.
निशंक की इस घोषणा को ठंडे बस्तें में डाले हुए भले ही आज 14 साल गुजर गए हो लेकिन आज भी पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक छोटी प्रशासनिक इकाइयों के पक्षधर है.रविवार कों ज़ब पूर्व मुख्यमंत्री कोटद्वार दौरे पर आए तो पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि छोटी प्रशासनिक इकाइयों से विकास विकास कार्यों में तेजी आती है और उनकी मॉनिटरिंग भी अच्छी तरह से होती है. पूर्व मुख्यमंत्री निशक्त ने साथी कहा कि सरकारों को इस और सोचना चाहिए की जितनी छोटी प्रशासनिक इकाइयां होंगी उतना जनता कों उसका लाभ मिलता हैं.निशंक ने कहा कि जब उत्तराखंड उत्तर प्रदेश में शामिल था तो तब यह पिछड़ा क्षेत्र कहलाता था.लेकिन अलग राज्य बनते ही जब 13 जिले अस्तित्व में आए तों धीरे-धीरे तब विकास ने रफ्तार पकड़नी शुरू की.पूर्व विधायक स्व.संतन बर्थवाल के आवास पर मीडिया से बात करतें हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि आने वाले समय में कोटद्वार सहित कई नए ज़िलें अस्तित्व में आएंगे,जों विकास की गंगा कों अंतिम छोर में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का काम करेंगी.






