सुरेन्द्र का मिला साथ तों रंजना के सिर सजेगा मेयर का ताज़

उत्तराखंड

उत्तराखंड में निकाय चुनाव का बिगुल बजते ही राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने अपना चुनाव प्रचार अभियान तेज कर दिया हैँ.उत्तराखंड की हॉट नगर निगम सीटों में से एक कोटद्वार नगर निगम सीट पर इस बार कांग्रेस ने रंजना रावत कों अपने प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतारा हैँ.जनहित से जुड़े मुद्दों कों लेकर पिछले सालों से सड़कों पर संघर्ष करने वाली रंजना रावत का नाम मात्र कोटद्वार तक ही सीमित नहीं हैँ बल्कि अंकिता भण्डारी हत्याकांड के दोषियों कों सजा दिलाने के लिए उनके द्वारा उठाई जा रहीं आवाज़ दिल्ली तक सुनाई दें रहीं हैँ.एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली रंजना रावत के नाम पर उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इसीलिए भी अपनी मुहर लगाई कि वह लगातार जनहित से जुड़े मुद्दों को सड़कों पर उठाती
रहीं हैँ.

नशा मुक्त कोटद्वार बनाने के प्रयासों से रंजना रावत कों मिली नई पहचान

पिछले कुछ सालों से रंजना रावत ने जिस प्रकार कोटद्वार कों नशा मुक्त बनाने का अभियान छेड़ा हुआ हैँ यह बात किसी से छुपी नहीं हैँ. कोटद्वार में जगह-जगह खुल रहें शराब के ठेकों,गली-गली में बिक रहीं स्मैक के खिलाफ उनके द्वारा चलाए जा रहें अभियानों में उन्हें मुकदमें तक झेलने पड़े, लेकिन इस अभियान में वह फिर भी पीछे नहीं हटी और यह अभियान आज भी ज़ारी हैँ. नशा मुक्त कोटद्वार बनने के लिए रंजना रावत ने लोगों कों जागरूक करने के साथ ही स्कूल, कॉलेजों छात्र छात्राओं कों भी अपने अभियान से जोड़ने का प्रयास किया ताकि भावी पीढ़ियों कों नशे की गर्त में जानें से बचाया जा सकें.

अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए आज भी चला रहीं हैँ अभियान

उत्तराखण्ड के चर्चित हत्याकांड में शामिल अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषियों को फांसी की सजा दिलाने के लिए रंजना रावत लगातार अपनी सहयोगी महिलाओं के साथ संघर्ष कर रहीं हैँ. अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए धरना प्रदर्शन से लेकर राजधानी देहरादून में सीएम आवास कूच के कार्यक्रमों में रंजना रावत ने अग्रणी भूमिका निभाई हैँ. अंकिता भंडारी के लिए उनके संघर्ष की गूंज तों दिल्ली तक सुनाई दी है,और इसी का नतीजा था कि कांग्रेस ने उनके संघर्ष और कुशल नेतृत्व को देखते हुए उन्हें कोटद्वार में मेयर प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतारा,ताकि जनता के लिए उनके उनके संघर्ष की धार और तेज हों सकें.

कांग्रेस की एक अनुशासित सिपाही की तरह करती रहीं हैँ पार्टी की सेवा

अपने राजनीतिक जीवन से लेकर आज तक रंजना रावत कांग्रेस पार्टी के एक अनुशाशित सिपाही की तरह काम करती रहीं हैँ.कांग्रेस पार्टी की मजबूती के लिए वह हमेशा केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ हमेशा मुखर रहीं हैँ.पार्टी के धरना प्रदर्शनों से लेकर संगठन की मजबूती के लिए रंजना रावत द्वारा किए गए कामों की खुद उनकी पार्टी के बड़े नेता तारीफ करतें रहें हैँ.उनकी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता का ही यह फल हैँ कि कांग्रेस की ओर से वह मेयर पद के चुनावी मैदान में हैँ.

कांग्रेसी दिग्गज सुरेन्द्र सिंह नेगी का मिला आशीर्वाद तों रंजना के चमकेंगे राजनीतिक सितारे

पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेसी दिग्गज सुरेन्द्र सिंह नेगी का रंजना रावत को यदि राजनीतिक आशीर्वाद मिला तों उनके राजनीतिक सितारे चमकने निश्चित हैँ. खुद रंजना रावत भी जानती हैँ कि बिना सुरेन्द्र सिंह नेगी के आशीर्वाद के बिना उसकी चुनावी नैया पार लगना असंभव हैँ, इसीलिए वह जनता के बीच जाकर अपने भाषणों में सुरेन्द्र सिंह नेगी का नाम ज़ोर शोर से लेने के साथ ही उन्हें अपना पिता तुल्य बता रहीं हैँ. उधर दूसरी ओर कांग्रेसी दिग्गज सुरेन्द्र सिंह नेगी भी जानते हैँ कि यदि इस बार रंजना रावत का साथ दिया तों 2027 की चुनावी लड़ाई फिर काफी आसान होंगी,क्योंकि रंजना रावत उनके लिए चुनावी मैदान मजबूत करने का ही काम करेंगी.और यदि ऐसा नहीं होता हैँ तों फिर 2027 के विधानसभा चुनाव में कोटद्वार में कांग्रेस के दो ध्रुव
खुलने तय हैँ.

कोटद्वार की मातृशक्ति और महिला होंने का रंजना रावत को मिलेगा लाभ

कांग्रेस पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरी रंजना रावत को कोटद्वार की मातृशक्ति और उनका खुद का महिला होंने का लाभ उन्हें इस चुनाव में मिल सकता हैँ.यह बात किसी से छुपी नहीं हैँ कि उत्तराखंड में कोई भी चुनाव रहा हों उसमें मातृशक्ति की हमेशा निर्णायक भूमिका रहीं हैँ,क्योंकि मातृशक्ति ने ही हर चुनाव बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी निभाई हैँ. कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र में 1 लाख 18 हजार 433 मतदाता हैँ जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 59,866 हैँ जों पुरुष मतदाताओं के मुकाबले कहीं अधिक हैँ. महिला मतदाताओं ने यदि महिला होंने के नाते कांग्रेस प्रत्याशी रंजना रावत पर भरोसा जताया तों फिर उनके सिर पर मेयर पद का ताज सजना निश्चित हैँ. लेकिन रंजना रावत को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि भाजपा प्रत्याशी शैलेन्द्र रावत की तरह वह भी भीतरघात का शिकार हों सकती हों इसीलिए उन्हें भी ऐसे लोगों पर नगर रखनी होंगी जों उसके लिए खाई खोदने का काम कर रहें हैँ.