आपदाग्रस्त धराली गांव में SDRF के IG अरुण मोहन जोशी ने संभाली हुईं है कमान,1200 से अधिक लोगों कों रेस्क्यू करने के बाद अब मलबे में दबे शवों को तलाशने का काम तेज

उत्तराखंड

जनपद उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल में खीर गंगा सें आए सैलाब में लापता हुए लोगों की तलाश तेज हो गई है.इस काम के लिए धराली को चार सेक्टरों में बांटकर सेना, आइटीबीपी, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ को जिम्मेदारी दी गयी है, जो दिनभर अपने-अपने सेक्टरों में डाग स्क्वाड, आधुनिक उपकरणों व खोदाई कर लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं. वहीं, खच्चरों से आपदा पीड़ितों तक बिस्तर व खाद्यान्न सामग्री पहुंचाई जा रही है.

गत 5 अगस्त की दोपहर करीब डेढ़ बजे खीरगंगा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के चलते धराली में कई आलिशान होटल, होमस्टे व आवासीय घर तबाह हो गए थे, जो कि करीब 40 से 50 फुट तक मलबे के ढेर के नीचे दब चुके हैं. हादसे में कई लोगों के लापता होने की आशंका है.

धराली आपदा का 8वां दिन: लापता लोगों की तलाश तेज, सेक्टरों में टीमें कर रही खोजबीन; खच्चरों की ली जा रही है मदद

उत्तराकाशी के धराली में आई आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है. लापता लोगों की तलाश के लिए क्षेत्र को चार सेक्टरों में बांटा गया है. सेना आईटीबीपी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें खोजबीन कर रही हैं. पीड़ितों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है.डीएम और विधायक ने प्रभावित परिवारों को सहायता राशि वितरित की है.सांसद ने भी आपदा पीड़ितों के लिए सहायता राशि दी है.

शासन-प्रशासन ने धराली आपदा के बाद इंसीडेंट कमांड पोस्ट की स्थापना की है. आईजी एसडीआरएफ अरुण मोहन जोशी इस पोस्ट के कमांडर के रुप में बचाव कार्य की कमान संभाल रहे हैं.

यहां धराली में सैलाब से तहस-नहस हुए पूरे इलाके को चार सेक्टरों में विभाजित कर सेना, आइटीबीपी, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ को लापता लोगों की खोजबीन के लिए लगाया गया है.

एसडीआरएफ के IG अरुण मोहन जोशी नें दी जानकारी

SDRF के IG अरुण मोहन जोशी ने बताया कि उक्त सभी टीमें अलग-अलग दिनभर अपने-अपने क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश के लिए आधुनिक उपकरणों के साथ डाग स्क्वाड की मदद से खोदाई का काम कर रही है.IG अरुण मोहन जोशी नें बताया सभी भी से प्राप्त सूचना शाम को संकलित की जाती है.साथ ही धराली के आपदा पीड़ितों तक खच्चरों के माध्यम से खाद्यान्न, कपड़े, बिस्तर, बर्तन, रसोई गैस आदि जरुरी सामग्री पहुंचाई जा रही है.

डबरानी में एक्सावेटर मशीन भागीरथी में समांई, आपरेटर लापता

डबरानी में गंगोत्री हाईवे को बहाल करने में लगी बीआरओ की एक एक्सावेटर मशीन सोमवार को सुबह करीब साढ़े दस बजे भागीरथी नदी में समां गई.हादसे में मशीन आपरेटर भी लापता बताया जा रहा है.आपदा कंट्रोल रूम ने उक्त हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि लापता आपरेटर की तलाश की जा रही है.

धराली में ग्राउंड जीरो पर एनडीआरएफ के कैडेवर डॉग्स

SDRF के IG अरुण मोहन जोशी नें जानकारी देतें हुए बताया कि धराली में मलबे में दबे लोगों कों ढूढ़ने के लिए NDRF के कैडेवर डॉग्स भी लगें हुए है,जिन्होंने आठ जगहों पर सूंघकर संकेत दिए,लेकिन ज़ब यहां खोदाई शुरू हुई तो नीचे से पानी निकल आया, जिससे वहां काम रोकना पड़ा.अब यहां ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) से ग्राउंड जीरो की स्कैनिंग की जा रही है. इस रडार की तरंगों से मलबे में दबे भवनों की खोज की जाएगी. इसके बाद जहां से सही दिशा में संकेत मिलेंगे वहीं पर खोदाई की जाएगी.

एसडीआरएफ के IG अरुण मोहन जोशी धराली में आपदा आने के बाद सें लगातार अभी तक वहीं डटे हुए है और ग्राउंड ज़ीरो पर उतरकर आपदाग्रस्त क्षेत्र से वहां फंसे लोगों को निकालने के बाद अब अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर दूसरे चरण में शवों को तलाश रहें है.

डीएम व क्षेत्रीय विधायक ने 98 प्रभावितों को बांटे पांच-पांच लाख रुपए

डीएम प्रशांत कुमार आर्य व क्षेत्रीय विधायक सुरेश चौहान ने धराली के आपदा पीड़ित 98 परिवारों को पांच-पांच लाख रुपए की सहायता राशि के चेक वितरित किए.इस दौरान उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन धराली आपदा पीड़ितों के दुख में उनके साथ है. उनके पुनर्वास के लिए भी सरकार की ओर से कार्यवाही की जा रही है.

राज्यसभा सांसद डॉ कल्पना सैनी ने एक माह का वेतन व एक करोड़ की सहायता राशि दी

राज्यसभा सांसद डा.कल्पना सैनी ने अपना एक माह का वेतन व अपनी सांसद निधि से एक करोड़ रुपए की सहायता राशि धराली आपदा प्रभावितों की मदद के लिए दी है.

उन्होंने आपदा पीड़ितों के पुनर्वास व राहत कार्यों में मदद के लिए सहायता की स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजा है। साथ ही उन्होंने आपदा के बाद सरकार की ओर से किए जा रहे राहत एवं बचाव कार्य की प्रशंसा भी की.

आपदा में तबाह हुआ धराली गांव अब दोबारा नहीं बसेगा उस जगह,CM हाउस में हुई बैठक में लिया गया फैसला 

तय हुआ कि धराली गांव सुरक्षित जगह शिफ्ट होगा.नदियों के किनारे और लैंडस्लाइड वाले संवेदनशील क्षेत्रों में कोई भी नया निर्माण नहीं होगा। इस तरह की संवेदनशील जगहों वाले अन्य गांव भी शिफ्ट किए जा सकते हैं.

बीते 10 साल में धराली इलाके में तीन आपदाएं आईं.तीन बार गांव तबाह हुआ, लेकिन हर बार स्थानीय लोगों ने वहां नई इमारतें खड़ी कर लीं। फिलहाल आपदा के 8 दिन बाद भी धराली गांव लाखों टन मलबे में दबा है.