मोकामा के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह को शनिवार देर रात पटना पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. उनके ख़िलाफ़ मोकामा विधानसभा क्षेत्र में दुलारचंद यादव की हत्या को लेकर एफ़आईआर दर्ज की गई है.
हत्या की इस घटना के बाद इलाक़े में तनाव का माहौल बना हुआ है और आरोप लगाए जा रहे हैं बिहार एक बार फिर से चुनावी हिंसा और अपराध के दौर में चला गया है.
दुलारचंद यादव की छवि भी बाहुबली नेता वाली थी और वे जन सुराज पार्टी के पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे. जबकि अनंत सिंह को मोकामा विधानसभा सीट से जनता दल यूनाइटेड ने चुनाव मैदान में उतारा है.
इसी सीट के वीणा देवी आरजेडी की उम्मीदवार हैं जो पूर्व सांसद और बाहुबली के तौर पर पहचान रखने वाले सूरजभान सिंह की पत्नी हैं.
सूरजभान सिंह की पत्नी को जब राष्ट्रीय जनता दल ने इस सीट से चुनाव मैदान में उतारा था, तभी से मोकामा सीट बिहार की हॉट सीट में से एक बन गया था.
मोकामा में बाहुबलियों के बीच है सीधी राजनीतिक लड़ाई
75 साल के दुलारचंद यादव तारतर गांव के रहने वाले थे. मोकामा टाल के इलाक़े में उनका काफ़ी प्रभाव माना जाता है. उन्होंने ख़ुद भी कई बार विधानसभा चुनाव लड़ा था.लेकिन इस बार चुनाव प्रचार के दौरान उनकी हत्या कर दी गईं और इसके आरोप लगें बाहुबली अनंत कुमार सिंह पर,जों खुद इस सीट से चुनाव लड़ रहें है.लेकिन अनंत सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए इसे सूरजभान सिंह की साजिश भी बताया था.
सार्वजनिक तौर पर अनंत सिंह अक्सर कई लोगों के बीच में दिखते हैं. उनके कई बयान और वीडियो सोशल मीडिया पर कई बार सुर्खियों में रहे हैं. अनंत सिंह जिस तरह बात करते हैं और जिन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, वह भी कई बार चर्चा में रहा है.
अनंत सिंह का पैतृक घर लदमा गांव में है, जो बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है.
अनंत सिंह की पत्नी का नाम नीलम देवी है जो ख़ुद भी मोकामा सीट से विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं. उनकी जीत को भी मोकामा इलाक़े में अनंत सिंह की छवि और उनकी ताक़त से जोड़ा जाता है.
चुनाव आयोग को सौंपी गई जानकारी के मुताबिक़ अनंत सिंह के ख़िलाफ़ कुल 28 आपराधिक मामले दर्ज हैं. हालांकि किसी भी मामले में अब तक उनको दोषी नहीं ठहराया गया है.
इनमें क़त्ल, जान से मारने की धमकी देने, जान से मारने की कोशिश, अपराधियों को संरक्षण देने, आपराधिक षडयंत्र रचने, धमकी, गाली-गलौज करने, अवैध हथियार रखने, सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने, अपहरण, चोरी और डकैती के लिए इकट्ठा होने जैसे कई आरोप शामिल हैं.
इससे पहले जनवरी महीने में भी अनंत सिंह ने एक आपराधिक मामले में सरेंडर किया था. बाढ़ कोर्ट में सरेंडर के बाद अनंत सिंह को न्यायिक हिरासत में पटना के बेऊर जेल भेज दिया था.
बाढ़ कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए अनंत सिंह ने मीडिया से कहा था, “नियम सरकार का होता है, नियम पालन करना होता है. हमारे ख़िलाफ़ एफ़आईआर किया गया तो हम सरेंडर किए और जेल जा रहे हैं.”
ये मामला सोनू-मोनू गिरोह से जुड़ा हुआ था. दरअसल 22 जनवरी की शाम राजधानी पटना से 110 किलोमीटर दूर नौरंगा जलालपुर गांव में दो गुटों के बीच गोलीबारी की एक घटना हुई थी, जिसका आरोप अनंत सिंह पर लगा था.
इन दोनों गुटों के बीच पुरानी दुश्मनी रही है. 22 जनवरी को हुई गोलीबारी की घटना के बाद 23 जनवरी को अनंत सिंह और सोनू दिन भर मीडिया इंटरव्यू के जरिए एक-दूसरे को ललकारते रहे.
अनंत सिंह अगस्त 2024 में ही आर्म्स एक्ट में बरी होकर जेल से बाहर आए थे.
एडीआर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह द्वारा दाखिल एफ़िडेविट के अनुसार उन पर 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं
बिहार की मोकामा विधानसभा सीट पर कई साल से अनंत सिंह के परिवार का दबदबा रहा है.
1990 और 1995 में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह इस सीट से चुनाव जीते. उन्हें इलाक़े में ‘बड़े सरकार’ के नाम से भी जाना जाता था.
इस तरह अनंत सिंह को ‘छोटे सरकार’ के नाम से भी जाना जाने लगा. साल 2005 में अनंत सिंह यहां से चुनाव जीते. वो यहां से लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके हैं.
तस्वीरों और वीडियो में देखा गया है कि अनंत सिंह को स्टाइल में रहना पसंद है.
एक बार तो उन्होंने अपना ख़ुद का वीडियो बनवाया, जिसमें वे पटना की सड़कों पर एक बग्घी में सवार थे. इसकी पृष्ठभूमि में जो गाना बज रहा था, उसके बोल ‘छोटे सरकार’ से शुरू हो रहे थे.
अनंत सिंह के जेल जाने के बाद साल 2022 के उपचुनाव में अनंत सिंह ने अपनी पत्नी नीलम देवी को इस सीट से खड़ा किया. उन्होंने भी इस सीट पर जीत हासिल की.
उनकी हैसियत का अंदाज़ा इसी बात से लग सकता है कि हाल ही में नीतीश कुमार अपने बाढ़ दौरे के दौरान अनंत सिंह से मिलने के लिए उनके पैतृक गांव लदमा पहुंच गए थे.






