स्पेशल सर्विस वाला गेस्ट कौन ? क्या CBI खोल सकेंगी अंकिता भंडारी हत्याकांड का राज

उत्तराखंड : तीन साल पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन हुए. हालांकि, समय-समय पर आंदोलन शांत जरूर हुए , लेकिन कभी पूरा आंदोलन खत्म नहीं हुआ. आम तौर पर किसी भी घटना को भूलने के लिए तीन साल का वक्त काफी माना जाता है, लेकिन अंकिता भंडारी का नाम प्रदेश की स्मृति से कभी पूरी तरह मिट नहीं पाया. कभी पीड़ित परिवार की मांगों के जरिए तो कभी विपक्षी दलों के आरोपों की वजह से यह मामला सत्ता के गालियारों में गूँजता रहा.

इस पूरे हत्याकांड के साथ एक शब्द लगातार जुड़ा रहा वीआईपी. विपक्ष, सामाजिक संगठन और पीड़ित परिवार बार-बार यह सवाल उठाते रहे कि आखिर वो कौन खास व्यक्ति था, जिसका नाम इस मामले में बार-बार लिया गया. हालांकि, पुलिस और बाद में गठित एसआईटी की जांच में अब तक ऐसे किसी वीआईपी की संलिप्तता से जुड़े ठोस तथ्य सामने नहीं आए.

अंकिता हत्याकांड के तीनों आरोपियों कों पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ता रहा, लेकिन साल दिसंबर 2025 के आखिर में अचानक यह मामला फिर से प्रदेश की राजनीति और समाज के केंद्र में आ गया. जिससे न केवल लोग सड़कों पर उतरे, बल्कि मुख्यमंत्री आवास तक कूच कर दिया और इसके बाद यह मामला देहरादून से दिल्ली तक जा पहुंचा.

28 दिसंबर को सोशल मीडिया से उठी चिंगारी

यह तारीख थी 28 दिसंबर, जब सहारनपुर निवासी उर्मिला सनावर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ पोस्ट और लाइव आकर वीडियो साझा कर दिए. उर्मिला उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सोशल मीडिया और मीडिया जगत के लिए कोई नया नाम नहीं थीं, वे खुद को हरिद्वार के ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताती रही हैं.

इससे पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर अपने पारिवारिक विवादों को लेकर सामने आती रही हैं. 28 दिसंबर को सोशल मीडिया पर लाइव आकर उर्मिला ने सुरेश राठौर के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए. लाइव के दौरान उन्होंने पहली बार खुले तौर पर अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र किया. उर्मिला के इन वीडियो में निजी विवादों के साथ कुछ ऐसे संकेत भी थे, जिससे लोगों का ध्यान सीधे इस तीन साल पुराने हत्याकांड की ओर चला गया.

ऑडियो कॉल और बढ़ता सस्पेंस

दिसंबर के विदाई से लेकर जनवरी के शुरुआती दिनों तक उर्मिला लगातार सोशल मीडिया पर लाइव आती रहीं. हर लाइव वीडियो में वे बड़े खुलासों का दावा करती रहीं. इसी बीच उनके और सुरेश राठौर के बीच की बताई जा रही ऑडियो कॉल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं.

इन ऑडियो कॉल में अंकिता भंडारी की हत्या से जुड़े कुछ कथित मामले सामने आने का दावा किया गया. सोशल मीडिया पर इन्हें सुनकर लोग हैरान हो गए. हालांकि, ये स्पष्ट करना जरूरी है कि इन ऑडियो कॉल की आधिकारिक पुष्टि न तो पुलिस ने की और न ही किसी जांच एजेंसी ने.

ये भी जांच का विषय है कि ये कॉल सही हैं या नहीं. यदि है तो इन्हें किस संदर्भ में रिकॉर्ड किया गया. इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इन वायरल कॉल्स को बेहद गंभीरता से लिया गया. मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेने लगा. कल तक जो लोग उर्मिला और सुरेश राठौर को जानते तक नहीं थे, वो उत्तराखंड की राजनीति का केंद्र बन गए.

कांग्रेस और यूकेडी की एंट्री से मचा सियासी उबाल

वायरल ऑडियो और उर्मिला के बयानों के बाद कांग्रेस और यूकेडी नें इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाया. लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में शांत दिख रही कांग्रेस और यूकेडी को इस मामले में सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका मिला.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और यूकेडी नेताओं ने इस मुद्दे को भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रही है और इसलिए वीआईपी का नाम सामने नहीं आ पा रहा.

मामलें नें तब और तूल पकड़ता है, जब कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल दिल्ली पहुंचते हैं और इस पूरे मामले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं. दिल्ली से उठी इस आवाज का असर ये होता है कि कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी समेत देश के कई बड़े नेता सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाने लगते हैं.

सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध

दिल्ली से लेकर देहरादून तक सियासी बयानबाजी के बीच उत्तराखंड में माहौल तेजी से बदलने लगा. सोशल मीडिया पर उर्मिला के बयान और वायरल ऑडियो आग की तरह फैल गई. देहरादून से पूरे प्रदेश में जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए.

सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई और एक सवाल हर जगह गूंजने लगा, वो वीआईपी कौन है? करीब 10 दिनों के भीतर प्रदेश का राजनीतिक और सामाजिक माहौल पूरी तरह बदल गया. तीन साल पुराना हत्याकांड फिर से जन चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया. कांग्रेस और बीजेपी के नेता एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते रहे.

मुख्यमंत्री की पहल और निर्णायक मोड़

उत्तराखंड के राजनीतिक माहौल के बीच इस मामले की कमान खुद मुख्यमंत्री ने संभाली और फिर वही हुआ, जो समय और माता-पिता की पीड़ा देख कर कोई भी मुख्यमंत्री करता. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की. यह मुलाकात बेहद अहम मानी गई.

मुलाकात से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर धामी मीडिया के सामने आए और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार इस मामले में वही फैसला करेगी, जो पीड़ित परिवार की इच्छा होगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि न्याय की राह में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी.

वहीं, माता-पिता से बातचीत के बाद 9 जनवरी की शाम करीब 5:30 बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे मामले की यानी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जांच की संस्तुति की घोषणा कर दी. संस्तुति करते ही कांग्रेस से मानो ये मुद्दा भी छीन लिया. इस फैसले को मास्टर स्ट्रोक भी कहा जा रहा है.