पनियाली गदेरे नें कौड़िया में आर्मी कें मेन गेट को भी किया ध्वस्त, हर साल अवैध अतिक्रमण बन रहा हैँ तबाही का कारण

उत्तराखंड कें कोटद्वार शहर कें बीचों बीच सें गुजरने वाला पनियाली गदेरा इससे सटे इलाकों कें लिए नासूर बनता जा रहा हैँ. रविवार रात को हुईं भारी बारिश कें बाद पनियाली गदेरे में आए उफान कें कारण भारतीय सेना का कौड़िया कैम्प का मेन गेट भी इससे धराशायी हों गया, जिससे सेना को लाखों का नुकसान पहुंचा हैँ, इतना ही नहीं पिछले सप्ताह भी भारी बारिश कें बाद ज़ब पनियाली गदेरे में जलजला आया तों उसने आर्मी कैम्प को जोड़ने वाली एक मात्र पुलिया को भी धराशायी कर दिया था.हालांकि ऐसा नहीं हैँ कि पनियाली गदेरे नें पहली बार तबाही मचाई हों इससे पहले भी यह गदेरा दर्जनों लोगों की जान लेने कें साथ ही करोड़ों का नुकसान कर चुका हैँ लेकिन बावजूद इसको लेकर आज तक क़ोई ठोस नीति नहीं बनाई गई, ताकि इससे होंने वाले नुकसान सें बचा जा सकें.

पनियाली गदेरे सें हों रहें नुकसान कें लिए अवैध अतिक्रमण और कब्जे हैँ ज़िम्मेदार

बरसात कें दिनों में कोटद्वार शहर कें लिए नासूर बनतें जा रहें पनियाली गदेरे सें हों रहें जानमाल कें नुकसान कें लिए लोग खुद ही जिम्मेदार हैँ.नजीबाबाद रोड निवासी पवन अग्रवाल बताते हैँ कि 80 कें दशक में पनियाली गदेरे का फाट इतना चौड़ा था कि बच्चे यहां फुटबाल और क्रिकेट खेला करतें थे और इस गदेरे कें किनारे दूर दूर तक क़ोई मकान भी नहीं थे  लेकिन 1985 कें बाद लोगों नें धीरे-धीरे पनियाली गदेरे कें किनारे अतिक्रमण कर मकान बनाने शुरू कर दिए और सिलसिला आज भी बस्तूर जारी हैँ. डिग्री कॉलेज सें लेकर कौड़िया कैम्प तक पनियाली गदेरे कें किनारे सैकड़ो की संख्या में अवैध अतिक्रमण कर मकान बनाए गए हैँ, जिसके कारण यह गदेरा सिकुड़ गया हैँ और इसी का नतीजा हैँ कि हर साल बरसात में ज़ब यह गदेरा अपने उफान पर आता हैँ तों इसके किनारें रह रहें लोगों कें घरों में इसका मलबा घुस जाता हैँ, क्योंकि बरसात कें पानी कें साथ आए मलबे को ज़ब निकलने कें लिए पनियाली गदेरे में जगह नहीं मिल पाती तों यह किनारे वालें घरों में घुस जाता हैँ, जिससे लोगों का लाखों का नुकसान होता हैँ.

 

प्रशासन मात्र नोटिस देनें तक हैँ सीमित

पनियाली गदेरे सें हों रहें हर साल नुकसान को यदि कोटद्वार कें प्रशासन नें गंभीरता सें लिया होता तों आज इस समस्या का समाधान हों गया होता.स्थानीय प्रशासन नें अवैध अतिक्रमण और अवैध कब्जे चिन्हित करने कें बाद अतिक्रमणकरियों को नोटिस तों जरूर दिए हैँ लेकिन कभी भी बलपूर्वक अवैध अतिक्रमण और अवैध कब्जे हटाने की जहमत नहीं उठाई जिसके कारण कुछ लोगों की वजह सें आज हजारों लोग मुसीबतों का सामना कर रहें हैँ.