विधायक ऋतु भूषण के सामने अपनों की चुनौती,कोटद्वार में भाजपा के टिकट कों लेकर बिछने लगी सियासी बिसात

उत्तराखंड! कोटद्वार!हिमांशु बडोनी!राजनीतिक विश्लेषण

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं.भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी तैयारियों को गति देते हुए सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारियों और कोर कमेटियों की नियुक्ति कर दी है.अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन सीटों पर मजबूत प्रत्याशी का चयन करना है,जहां मौजूदा विधायकों को लेकर असंतोष की चर्चाएं हैं और संगठन के भीतर नए चेहरों की दावेदारी लगातार मजबूत हो रही है.इसी कड़ी में कोटद्वार विधानसभा सीट भाजपा के लिए महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है.यहां 2027 के चुनाव में टिकट किसे मिलेगा, इसे लेकर राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है.पार्टी के भीतर संभावित प्रत्याशियों की दावेदारी, कार्यकर्ताओं की राय, स्थानीय समीकरण और जनता के बीच नेताओं की स्वीकार्यता को लेकर मंथन का दौर जारी है.

कोटद्वार विधानभा में भाजपा के टिकट का ताज़ किसके सिर सजेगा इसको लेकर राजनीतिक चर्चाएं जोर शोर के साथ चल रही हैं.कोटद्वार में आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के संभावित दावेदारों की वैसे तो लंबी फौज हैं लेकिन जिन चेहरों पर पार्टी नें गंभीरता से विचार किया उसमें पांच नाम प्रमुख हैं.कुछ दिन पहले भाजपा नें ज़ब कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज कों कोटद्वार विधानसभा में संभावित भाजपा नेताओं का पैनल तैयार करने के लिए कोटद्वार भेजा तो उसमें भी इन्ही पांच नेताओं नें अपनी दावेदारी मजबूती के साथ उनके सामने रखी.इनमें वर्तमान विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण, भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुमन कोटनाला,राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल और कोटद्वार के मेयर शैलेन्द्र सिंह रावत और पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह रावत के शामिल थे.

1. ऋतु भूषण — अनुभव और मौजूदा राजनीतिक पहचान

कोटद्वार से वर्तमान विधायक ऋतु भूषण के पास विधानसभा अध्यक्ष का महत्वपूर्ण अनुभव और पार्टी में स्थापित राजनीतिक पहचान है.मौजूदा विधायक होने के नाते उनकी दावेदारी स्वाभाविक रूप से मजबूत मानी जा रही है.लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र में उनके कामकाज को लेकर उठ रहे सवाल और जनता के एक वर्ग में दिखाई दे रही नाराजगी है.
कोटद्वार में सड़क, स्वास्थ्य, विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं को लेकर समय-समय पर उठने वाले सवालों ने उनकी राजनीतिक राह आसान नहीं रहने दी है.स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि मौजूदा विधायक के प्रति लोगों की नाराजगी का असर 2027 के टिकट चयन पर पड़ सकता है.उधर इससे इतर देखें तो ऋतु भूषण के खाते में कोटद्वार के विकास कि कुछ बड़ी उपलब्धियां भी शामिल हैं,जों उनके टिकट की दावेदारी कों मजबूत बनाती हैं.

2.सुमन कोटनाला: संगठन में सक्रियता और अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के दम पर दावेदारी

भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुमन कोटनाला का नाम भी कोटद्वार विधानसभा से संभावित दावेदारों में चर्चा में है.संगठन में उनकी भूमिका और पार्टी के भीतर सक्रियता उनकी दावेदारी का आधार मानी जा रही है.कोटद्वार में महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बनाने की दिशा में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है.यदि भाजपा नेतृत्व नए चेहरे के विकल्प पर विचार करता है तो सुमन कोटनाला की दावेदारी को भी नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.सुमन कोटनाला की व्यक्तिगत जनता के बीच स्वीकार्यता और चुनावी कुशल प्रबंधन उनकी दावेदारी कों मजबूत करता हैं.

3.राजेंद्र अंथवाल: आयोग के अध्यक्ष होने का अनुभव, राजनीतिक पहचान का लाभ

राजनीतिक अनुभव और संगठन से जुड़ाव राज्य गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल का नाम भी कोटद्वार की राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहा है.आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी और राजनीतिक गतिविधियां उनकी दावेदारी के महत्वपूर्ण पक्ष हैं.राजेंद्र अंथवाल के लिए 2027 का चुनाव अपनी राजनीतिक सक्रियता को विधानसभा स्तर पर स्थापित करने का अवसर हो सकता है.पार्टी संगठन में उनकी स्वीकार्यता, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और क्षेत्र में उनकी सक्रियता टिकट की दौड़ में उनकी स्थिति तय करने वाले अहम पहलू हों सकतें हैं.

4.शैलेन्द्र सिंह रावत: मेयर पद की जिम्मेदारी के साथ विधानसभा पर नजर?

स्थानीय राजनीति और शहरी जनसंपर्क कोटद्वार के मेयर शैलेन्द्र सिंह रावत का नाम भी संभावित प्रत्याशियों की चर्चा में शामिल करता है.स्थानीय निकाय की राजनीति से जुड़े होने के कारण उनके पास शहर की समस्याओं और स्थानीय जनसंपर्क का अनुभव है.कोटद्वार की शहरी समस्याओं, विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी भूमिका उनकी राजनीतिक दावेदारी के आकलन का आधार बन सकती है.हालांकि शैलेन्द्र सिंह रावत के लिए टिकट की दौड़ इतनी आसान नहीं हैं क्योंकि वर्तमान में कोटद्वार के मेयर पद की जिम्मेदारी संभाल रहें शैलेन्द्र सिंह रावत पर भाजपा 2027 में दांव लगाएगी इसकी उम्मीद थोड़ी कम ही हैं.

5.वीरेंद्र सिंह रावत :युवा चेहरा,संगठन में मजबूत पकड़ टिकट का बन सकता हैं आधार

कोटद्वार विधानसभा के लिए वीरेंद्र सिंह रावत 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए युवा चेंहरे के रूप में तेजी के साथ आगे आए हैं.छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले वीरेंद्र सिंह रावत और युवा मोर्चे के साथ ही भाजपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं.भाजपा जिलाध्यक्ष कें रुप में कोटद्वार में निकाय चुनावों में बेहतरीन काम करने वाले वीरेंद्र रावत युवाओं के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं,जों उनकी दावेदारी कों मजबूती प्रदान करता हैं.
हालांकि भाजपा प्रदेश आलाकमान के अंदर मंथनों का दौर ज़ारी हैं कि कौन सा चेहरा विपक्ष के संभावित प्रत्याशी को कड़ी चुनौती दे सकता है? लेकिन बूथ अध्यक्ष,मंडल पदाधिकारियों और स्थानीय कार्यकर्त्ताओं से भी राय ली जाएगी कि कौनसा दावेदार विपक्ष के चुनावी किले कों भेदने में सफल हों सकता हैं.