लैंसडाउन विधानसभा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठें सवाल, विपक्ष नें भी साधा निशाना

उत्तराखंड | लैंसडाउन | हिमांशु बडोनी

लैंसडाउन। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव-2027 की आहट के बीच लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है.तीन बार के भाजपा विधायक महंत दिलीप रावत के सामने एक ग्रामीण महिला ने रिखणीखाल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ऐसा सवाल उठा दिया,जिसने क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है.
ग्रामीण महिला ने विधायक से सीधे सवाल करते हुए कहा, “विधायक जी, आप तो अपना इलाज करवाने मुंबई चले गए, लेकिन हम कहां जाएं?”
महिला का यह सवाल केवल एक जनप्रतिनिधि से शिकायत नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत को सामने रखने वाला मुद्दा बन गया है.स्थानीय स्तर पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता है.ऐसे में महिला ने विधायक के सामने आम लोगों की उस परेशानी को उजागर किया, जिसका सामना ग्रामीण परिवारों को बीमारी के समय करना पड़ता है.

महिला के सवाल से घिरे विधायक, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

महिला के सवाल ने विधायक के सामने स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति को लेकर असहज करने वाली परिस्थिति पैदा कर दी.इस पूरे मामले में विधायक की प्रतिक्रिया और जवाब को लेकर भी चर्चा हो रही है.महिला के सवाल का संतोषजनक जवाब सामने नहीं आने की बात कही जा रही है.
लैंसडाउन जैसे पर्वतीय विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं लंबे समय से जनसरोकारों से जुड़ा अहम विषय रही हैं.ग्रामीण इलाकों में चिकित्सकों की उपलब्धता, अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं और गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिलना बड़ी चुनौतियां मानी जाती हैं.

मिशन-2027 में स्वास्थ्य सेवाएं बन सकती हैं बड़ा चुनावी मुद्दा

विधायक के सामने ग्रामीण महिला की ओर से उठाया गया यह सवाल अब पूरे विधानसभा क्षेत्र में चर्चा का विषय बताया जा रहा है.आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भाजपा विधायक महंत दिलीप रावत के लिए भी एक अहम राजनीतिक सवाल बन सकती है.
विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर विधायक पर निशाना साधा है.विपक्ष के लिए यह मामला सरकार और जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर घेरने का अवसर बन गया है.

जनता का सवाल साफ—इलाज के लिए आखिर कहां जाएं ग्रामीण?

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर इलाज के लिए अपने क्षेत्र से बाहर जाना पड़े, तो स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ आम जनता को किस हद तक मिल रहा है?
लैंसडाउन में अब सवाल सिर्फ एक महिला की शिकायत का नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और चुनाव से पहले जनता की अपेक्षाओं का है। मिशन-2027 के करीब आते हुए यह देखना अहम होगा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उठ रहे इन सवालों पर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि क्या कदम उठाते हैं.

मिशन-2027 में स्वास्थ्य सेवाओं कों कांग्रेस बनाएंगी मुद्दा

विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों के बीच रिखणीखाल का यह घटनाक्रम भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन गया हैं. कांग्रेस नेता रघुवीर बिष्ट नें इस मुद्दे पर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगा हैं.रघुवीर बिष्ट से स्थानीय भाजपा विधायक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करतें हुए कहा कि बड़े अफ़सोस की बात हैं कि विधायक दिलीप रावत विधायक हैं तो लैंसडाउन से और रहते कोटद्वार हैं.उन्हें लैंसडाउन की जनता की यदि जरा भी पीड़ा होती तो आज स्वास्थ्य सुविधाओं के बुरे हाल नहीं होते.कांग्रेस नेता बिष्ट कहा कि लैंसडाउन विधानसभा में सिर्फ बुखार और सिरदर्द की दबाई मिल रही हैं,इस क्षेत्र की जनता कों यदि अपने खून की जाँच करवानी हों तो रामनगर और कोटद्वार जाना पड़ता हैं.उन्होने कहा कि लैंसडाउन के ग्रामीण क्षेत्रों में आम लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए कांग्रेस लगातार सरकार से मांग क़र रही हैं लेकिन सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही हैं.रघुवीर बिष्ट नें कहा कि भाजपा विधायक दिलीप रावत की अनदेखी का खामियाजा aaj