माफिया अतीक अहमद,अपराध की दुनिया में कदम रखने से लेकर मिट्टी में मिलने तक की पूरी दास्तां।

लखनऊ,up: उत्तर प्रदेश का वह नाम जिसको सुनकर हर कोई कांप जाता था। उसने खुद को बचाने के लिए कितने दांव पेंच लगाए। उसकी पूरी फैमिली उसे बचाने में लगी रही। सारी विरोधी राजनीतिक पार्टियों ने भी एड़ी चोटी एक कर दी, लेकिन यूपी की जनता को अपनी खौफ के साये में रखने वाले माफिया अतीक हफ्तों से खौफ के साये में जी रहा था। पहले तो उसके कारनामों के कारण उसके घर का चिराग बुझा फिर वह खुद ही मिट्टी में मिल गया। 

उसकी मौत उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के सभी गैंगस्टर और माफियाओं के लिए एक बड़ी सबक है। लाख कोशिश की यूपी पुलिस ने उसे खुद से बचाने  लिए दिन रात उसकी निगरानी की और मीडिया ने भी उसकी पल-पल की कवरेज की, लेकिन सबके सामने खुलेआम उसका अंत इतना बुरा हुआ कि जिसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता।

अतीक अहमद कोई साधारण इंसान नहीं था। वह मरते वक्त जितना मासूम और बेचारा दिखाई दिया, वह उससे भी ज्यादा खूंखार था। उसने ना जाने कितने घर उजाडे होगे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस पर 150 से ज्यादा केस दर्ज थे। यह संख्या तो वह थी जो थाने में दर्ज की गई थी। कितने मामले तो यूं ही दबा दिए गए होंगे।

अतीक की क्राइम हिस्ट्री

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले का रहने वाले ने अतीक ने 1979 में 17 साल की उम्र में पहला अपराध किया उसके बाद उसने 150 से ज्यादा क्राइम कर अपराध की दुनिया में अपना नाम बनाया। अतीक अहमद जून 1995 में लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस कांड के मुख्य आरोपियों में से एक था, जिन्होंने मायावती पर हमला किया था। मायावती ने गेस्ट हाउस कांड के कई आरोपियों को माफ कर दिया था, लेकिन अतीक अहमद को नहीं… मायावती के सत्ता में आने के बाद अतीक अहमद की उल्टी गिनती शुरू हुई और बसपा के शासनकाल में अतीक का दफ्तर गिरवाकर उसकी संपत्तियां जब्त कर ली गई थी और उसे जेल भेज दिया गया था।

राजू पाल हत्याकांड

राजू पाल हत्याकांड की साजिश तब रची जाती है जब बसपा के राजू पाल ने प्रयागराज की पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव में अतीक के भाई अशरफ को हरा दिया था। दरअसल यूपी की फूलपुर लोकसभा सीट से अतीक अहमद ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी.. लेकिन उसके सांसद बन जाने के बाद वह सीट खाली हो गई थी… जिसके बाद उपचुनाव का ऐलान हुआ समाजवादी पार्टी ने सांसद अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ को अपना उम्मीदवार बनाया।

अशरफ की हार से अतीक अहमद बौखला गया और फिर साजिश रची गई राजू पाल के हत्या की… और कुछ ही महीनों बाद पहली बार विधायक बने राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई… इस हत्याकांड में दो और लोगों की मौत हुई थी जिनका नाम था देवी पाल और संदीप यादव। इस सनसनीखेज हत्याकांड में सीधे तौर पर तत्कालीन सांसद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का नाम सामने आया था..

अतीक अहमद के खिलाफ FIR

वही विधायक राजू पाल की नव विवाहिता पत्नी पूजा पाल ने थाना धूमनगंज में हत्या का मामला दर्ज कराया था। उस रिपोर्ट में सांसद अतीक अहमद, उनके भाई अशरफ, खालिद अजीम को नामजद किया गया था।  मामला दर्ज हो जाने के बाद पुलिस ने मामले की छानबीन शुरु कर दी थी।

राजूपाल हत्या के मुख्य गवाह था उमेश पाल

राजू पाल हत्याकांड में उमेश पाल एक अहम और चश्मदीद गवाह था। जब केस की छानबीन शुरू हुई तो उसे धमकियां भी मिलने लगी थी जिसके बाद  कोर्ट के आदेश पर उमेश पाल को यूपी पुलिस की तरफ से सुरक्षा के लिए दो गनर दिए गए थे। लेकिन अतीक ने उमेश पाल को भी नही बख्शा उसने जेल में रहकर ही उमेश पाल हत्याकांड की पूरी साजिश रची….आरोप है कि अतीक के इशारे पर ही उमेश पाल को दिन दहाड़े उड़के घर के सामने गोलियों से छलनी कर दिया गया।

देवरिया कांड

26 दिसंबर 2018 को प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मोहित जायसवाल नाम के एक व्यापारी का अपहरण किया गया था और उसे देवरिया जेल में बंद अतीक के पास लाया गया जहां अतीक के गुर्गों ने मोहित से मारपीट कर.. एक सादे कागज पर उसकी एक संपत्ति को अपने नाम कर लिया.. मोहित ने आरोप लगाया था कि उनका अपहरण अतीक अहमद ने ही करवाया था… इस घटना के बाद अतीक को देवरिया से बरेली जेल भेजा गया…. लेकिन बरेली जेल प्रशासन ने अतीक को रखने से इनकार कर दिया था जिसके बाद अतीक को यूपी सरकार ने प्रयागराज के नैनी जेल में रखा.. दूसरी तरफ देवरिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया फिर सीबीआई ने अतीक अहमद समेत एक दर्जन लोगों पर मामला दर्ज किया।

साबरमती जेल कैसे पहुंचा माफिया अतीक

23 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि अतीक अहमद को यूपी के बाहर किसी जेल में शिफ्ट किया जाए। जिसके बाद यूपी सरकार ने 3 जून 2019 को उसे अहमदाबाद की साबरमती जेल में शिफ्ट किया। तब से अब तक अतीक अहमद साबरमती जेल में ही बंद था।

खौफ का हुआ दर्दनाक अंत

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह सनसनीखेज वारदात तब हुई जब अतीक अहमद को पुलिस ने मेडिकल कराने के लिए प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में ले गई थी। पूरी पुलिस फोर्स और मीडिया के सामने रात लगभग 10:33 बजे के आसपास अतीक को सिर में गोली मारी गई। हमलावरों ने गैंगस्टर भाईयों को गोलियां से भूनने के बाद ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। हालांकि तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

हमलावरों ने पुलिस पर गोली नहीं चलाई और भागने का प्रयास भी नहीं किया। इन तीनों हमलावरों के नाम अरुण मौर्या, लवलेश तिवारी और सनी सिंह बताए जा रहा हैं। अतीक की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। धारा 144 लागू कर दी गई। योगी आदित्यनाथ ने घटना की जांच के आदेश दिए। लेकिन सवाल अभी भी बाकी है कि आखिरकार पुलिस और मीडिया की मौजूदगी में इतनी बड़ी वारदात कैसे हुई?