मुजफ्फरनगर,यूपी। 2013 के दंगे में गैंगरेप की शिकार हुई मुस्लिम महिला को एक अरसे बाद इंसाफ मिला है। अदालत ने दो रेपिस्टों को 20-20 साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका है। सजा के बाद अदालत से बाहर निकलते वक्त रेपिस्ट ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि ‘वो 22 साल से बाहर रह रहा है। पीड़िता को जानता तक नहीं। जबकि दूसरे रेपिस्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये तो नामर्द है।
- केदारनाथ धाम के खुलें कपाट,हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजी केदार नगरी
- कौन है ईरान के हथियारों की सबसे बड़ी डीलर शमीम माफ़ी,लेडी डॉन का बहुत बड़ा है नेटवर्क
- सैटेलाइट फ़ोन रखने पर हो सकती है गिरफ्तारी,क्या भारत में बैन है सैटेलाइट फ़ोन,जानिए वजह
- 50 दिन में 50 अरब डालर का तेल स्वाह,पूरी दुनिया ने चुकाई जंग की कीमत
- डोनाल्ड ट्रम्प ने की पाकिस्तान की तारीफ़,कहा..जल्द जा सकता हूँ मैं इस्लामाबाद
विशेष पोक्सो अदालत ने मंगलवार को शामली जिले के फुगाना थाना इलाके के लांख गांव निवासी महेशवीर और सिकंदर को गैंगरेप और जान से मारने की धमकी के मामले में दोषी करार देते हुए 20-20 साल की सजा सुनाई। सजा के बाद कोर्ट रूम से बाहर निकलने के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए दोषी करार दिए गए सिकंदर ने खुद को बेगुनाह बताया। उसने बताया कि ‘वो 22 सालों से बाहर रह रहा है। उसे कुछ नहीं पता। पूरा मामला झूठा है। पहले मारपीट और तोड़फोड़ की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसके बाद गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया गया। वो पीड़िता को जानता तक नहीं।’ उसने कहा कि ‘हम लोग इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।’ सिकंदर ने इस दौरान महेश वीर की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ‘ये तो ना मर्द है। सिकंदर ने ये बात एक बार नहीं, बल्कि कई बार कही।
यह भी पढ़े:-





