बेलगाम सिस्टम कें आगें लाचार नजर आई विधानसभा अध्यक्ष, खनन माफियाओं की करतूत का अब जनता कें साथ भुगत रहीं खामियाजा

उत्तराखंड कोटद्वार

कोटद्वार में मालन नदी पर बनें करोड़ों की लागत वालें पुल कें अवैध खनन की भेंट चढ़ने कें बाद प्रदेश की सियासत गर्मा गई हैँ. भाजपा एक ओर जहाँ मालन नदी में भारी बारिश कें बाद आए उफान कों जिम्मेदार ठहरा रहीं हैँ तों वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सहित दूसरें दलों नें इसके लिए मालन नदी में दिन रात हुए अवैध खनन कों जिम्मेदार ठहराया हैँ. पूर्व सीएम भुवन चंद खंडूडी कें कार्यकाल में कोटद्वार में करोड़ों की लागत सें बनें जिन पुलों कों भारतीय जनता पार्टी हमेशा सें अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाकर अपनी चुनावी वैतरणी पार करती आई हैँ उसी भाजपा सरकार में खनन माफियाओं नें इन पुलों की नीव तक खोदकर सरकारी अमलें सहित भाजपा कें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैँ. हालांकि ऐसा नहीं हैँ कि मालन नदी पर बनें पुल टूटनें की घटना अचानक हुई हों बल्कि इसकें पीछे पिछलें कई सालों सें पुल कें आस पास होता वह अवैध खनन ही था जिसकों रोकनें की कागजों में कोशिश तों की गई लेकिन धरातल पर वह कोशिशें नहीं हुई जों होनी चाहिए थी.

सिस्टम कें आगें बेबस नजर आई विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी

खुद कोटद्वार सें विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण भी कोटद्वार कों अपने पिता द्वारा दी गई इन बड़ी सौगातों कों बचानें कें लिए शासन स्तर पर प्रयास करती रहीं लेकिन बेलगाम हों चुकी नौकरशाही कें आगें वह भी बेबस नजर आई, और उनकी यह बेबसी उस समय साफ नजर आई ज़ब मालन नदी पर बनें पुल टूटने कें बाद आपदा सचिव रंजीत सिन्हा सें फ़ोन पर बात करतें उनका एक वीडियों सोशल मीडिया में वायरल हों गया. इस वीडियों में भाजपा विधायक ऋतु भूषण साफ क़ह रहीं हैँ कि वह लगातार कोटद्वार कें मालन और सुखरों नदियों पर बनें पुलों कों बचानें कें लिए पत्राचार कें साथ-साथ बैठकों में भी मांग करती रहीं हैँ लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया और इसी का परिणाम हैँ कि आज मालन नदी पर बना पुल ज़मींदोज हों गया हैँ.

 

शासन-प्रशासन की सक्रियता पर उठ रहें हैँ अब बड़े सवाल

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की कोटद्वार विधानसभा में पुल टूटनें की घटना कों कितनी गंभीरता सें लिया गया इसका अंदाजा इसी बात सें लगाया जा सकता हैँ शासन में उच्चें पदों पर बैठें जिम्मेदार अधिकारियों नें मौक़े पर पहुंचने की जहमत तक नहीं उठाई. जिस पुल दुर्घटना में एक युवक की मौत हों गई 2 लोग अभी भी लापता बताए जा रहें हों और करोड़ों की सम्पति का नुकसान हों गया हों उसकों लेकर अधिकारी देहरादून में बैठकर ही बयानबाजियां कर रहें हैँ. आपदा सचिव, लोक निर्माण विभाग कें सचिव कें साथ साथ लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी जिस मंत्री कें कधों पर हैँ उन्होंने नें भी मौकें पर पहुंचने की जहमत नहीं उठाई.

 

मालन पुल का ज़मींदोज होंना,बन सकता हैँ चुनावी मुद्दा

खनन माफियाओं की काली करतूत की भेंट चढ़े मालन पुल कों लेकर आने आने दिनों में राजनीति होना तय हैँ. आगामी निकाय चुनाव में कांग्रेस इस मुद्दे कों तूल देकर जनता कें बीच खोई अपनी साख कों फिर सें वापस लानें का प्रयास करेंगी. हालांकि भाबर क्षेत्र की जनता कों आवाजाही में किसी प्रकार की क़ोई दिक्क़त न हों इसकें लिए डीएम पौड़ी डॉ आशिष चौहान द्वारा वैकल्पिक मार्ग कलालघाटी-मावाकोट-घराट-डिग्री कॉलेज रोड़ पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया हैँ और वैली ब्रिज बनानें कें निर्देश जारी कर दिए गए हैँ.लेकिन सिस्टम की उदासीनता कों देखतें हुए इस पर जल्द काम होंने की संभावना कम ही हैँ. कुल मिलाकर यदि देखा जाए तों मालन नदी पर पुल टूटनें की घटना सें भाजपा सरकार बैकफुट पर हैँ और कोटद्वार में कांग्रेस कों बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा मिल गया हैँ, जिसें वह अब चुनावी मुद्दों में एक हथियार की तरह इस्तेमाल करेंगी.