कोटद्वार में मालन नदी पर बना पुल हुआ ज़मींदोज, अवैध खनन कों मिली खुली छूट बनी बड़ी वजह

उत्तराखंड कोटद्वार

मानसून की पहली बारिश सें ही कोटद्वार की जनता की दुश्वारियां बढ़ने लगी हैँ. भाबर क्षेत्र की लाखों की जनता कों जोड़ने कें लिए मालन नदी पर बनें जिस पुल कों कोटद्वार- भाबर की लाइफ लाइन कहा जाता था वह पुल गुरुवार सुबह खनन माफियाओं की भेंट चढ़ता हुआ भरभरा कर बीच सें टूट गया. हालांकि ऐसा नहीं हैँ कि करोड़ों की लागत सें बना यह पुल अचानक टूटा हों. दरअसल इस पुल कें आसपास सालों सें खनन माफिया नदी कों खोदनें का काम कर रहें थे, लेकिन मजाल हैँ कि कभी इन खनन माफियाओं कें विरुद्ध कभी क़ोई कठोर कार्यवाही हुई हों, जिसका खामियाजा यह रहा कि खनन माफियाओं नें 40 हजार सें अधिक कि आबादी की सुविधा कें लिए बनाएं गए पुल कें पिलर तक खोद डालें,जिसके कारण गुरुवार कों भारी बारिश कें बीच मालन पुल बीच सें टूट कर ज़मीदोंज हों गया.

सिडकुल कें साथ ही 40 हजार सें अधिक की जनता का शहर सें सीधा संपर्क टूटा

खनन माफियाओं की काली करतूत की भेंट चढ़े मालन नदी पर बनें पुल कें टूटने सें सिंगड्डी ग्रोथ सेंटर कें साथ ही जशोधरपुर इंडस्ट्रीयल एरिया सें भी कोटद्वार शहर का सीधा संपर्क टूट गया हैँ जिसकें कारण इसका खामियाजा उद्योगों कों चुकाने कें लिए मजबूर होना पड़ेगा, इतना ही नहीं 40 हजार सें अधिक की जनता की सुविधा कें लिए बनें इस पुल कें टूटने सें उसकों भी खासी दिक्कतों का सामना करने कें लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि इसी पुल सें स्कूली बच्चों कें साथ ही जनता की भी आवाजाही हुआ करती थी.

मालन नदी कें आस-पास खुलें रेत बजरी और पत्थर कें स्टॉक भी पुल गिरने कें हैँ कारण

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में वन मंत्री रहें हरक सिंह रावत ज़ब 2017 सें 2022 कें बीच विधायक रहें तों इस दौरान कोटद्वार की नदियों में ज़मकर वैध और अवैध खनन का खेल खेला गया. इस दौरान खनन माफियाओं कें हौसलें इतने बुलंद थे कि उन्होंने न केवल मालन नदी पर बने पुल बल्कि सुखरों नदी पर सिंबलचौड़ और बीईएल रोड़ पर बनें पुलों कें पिलर तक खोद डालें, जिसका खामियाजा कोटद्वार की जनता मालन पुल कें टूटने पर आज भुगत चुकी हैँ जबकि सुखरों नदी पर बना पुल भी गिरने की कागार पर खड़ा हैँ. हरक सिंह रावत कें कार्यकाल कें दौरान मालन नदी कें आस पास स्टॉक खोलनें की बाढ़ सी आ गई थी, जिसकी क़ीमत मेडिकल कॉलेज कें लिए चिन्हित भूमि तों पहलें ही चुका चुकी हैँ और अब मालन नदी पर बना पुल भी गिर कर इसकी सच्चाई सभी कों बता चुका हैँ.

 

मालन पुल टूटने पर भाजपा कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल कें नेताओं की प्रतिक्रिया भी आई सामनें

सुखरों नदी पर बनें पुल टूटने की सूचना मिलतें ही मौक़े पर पहुँचे भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र रावत का कहना था कि पुल का टूटना दुर्भाग्यपूर्ण हैँ और इसके जल्द सें जल्द निर्माण कें लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी सें आग्रह किया जाएगा.

उधर दूसरी मालन पुल टूटने कें बाद उसके निरीक्षण कें लिए मेयर सहित मौक़े पर पहुँचे पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी नें कहा कि कोटद्वार में अवैध खनन कें लिए मिली खुली छूट का ही परिणाम हैँ कि मालन नदी पर बना पुल टूट चुका हैँ जबकि दूसरें पुल भी गिरने की कागार पर हैँ.

भाजपा कांग्रेस की मालन नदी पर बनें पुल कें गिरने पर सामनें आई प्रतिक्रिया कें बाद यूकेडी नें भी अपनी प्रतिक्रिया इस मामलें में दी हैँ. यूकेडी कें वरिष्ठ नेता डॉ शक्ति शैल कपरवाण नें मालन नदी पर बनें पुल कें गिरने कें लिए जनता कों भी जिम्मेदार ठहराया हैँ.डॉ कपरवाण का कहना था कि कोटद्वार कें सभी पुलों कों खनन माफियाओं से बचाने कें लिए उनकी पार्टी लगातार सड़कों पर संघर्ष करती रहीं लेकिन जनता का समर्थन उन्हें नहीं मिल पाया, जिसका खामियाजा आज जनता खुद भुगत रहीं हैँ.

पुल गिरनें कें बाद क्या बोलें कोटद्वार कें एसडीएम प्रमोद कुमार

मालन नदी पर बनें करोड़ों कें पुल कें गिरने कें बाद अब भाबर क्षेत्र की जनता की कोटद्वार शहर से सीधी कनेक्टिविटी की समस्या ख़डी हों गई हैँ. कोटद्वार एसडीएम प्रमोद कुमार नें जानकारी देतें हुए बताया कि अब वैकल्पिक व्यवस्था के तहत डिग्री कॉलेज-घराट-मावाकोट-कलालघाटी वाली सड़क पर ट्रैफिक कों डायवर्ट किया जा रहा है ताकि हल्दूखाता, कलालघाटी, किशनपुर, झंडीचौड़ सहित सिगड्डी की जनता कों आवाजाही में दिक्क़त न हों. साथ ही उन्होंने जानकारी देतें हुए बताया कि मालन नदी में पानी कम होंने पर इससे भी वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया जाएगा.