लैंसडाउन विधानसभा में इस बार मजबूत मुकाबले के संकेत,धस्माना की एंट्री से भाजपा में हलचल तेज

लैंसडाउन। विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर लैंसडाउन सीट पर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं.कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना की संभावित एंट्री ने चुनावी मुकाबले को लेकर चर्चाओं को गरमा दिया है.संगठन और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले धस्माना को कांग्रेस के संभावित मजबूत चेहरों में माना जा रहा है.
सूर्यकांत धस्माना को पहाड़ की राजनीति और चुनाव लड़ने का पुराना अनुभव है.वह पूर्व में एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए लैंसडाउन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं.उनका बगयाली गांव भी लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र से सटा हुआ है, जिसके चलते क्षेत्र से उनका पुराना जुड़ाव माना जाता है.खुद स्थानीय लोग भी सूर्यकान्त धस्माना कों लैंसडाउन विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए बुला रहें है.
लैंसडाउन सीट पर भाजपा के दिलीप रावत लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं.कांग्रेस के सामने अब तक इस सीट पर सबसे बड़ी चुनौती मजबूत प्रत्याशी को लेकर रही है.ऐसे में यदि कांग्रेस धस्माना को मैदान में उतारती है तो भाजपा के सामने इस बार मुकाबला पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

भाजपा के नाराज धड़े पर भी नजर

स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार विधायक दिलीप रावत से नाराज चल रहा भाजपा का एक बड़ा धड़ा भी सूर्यकांत धस्माना के संपर्क में बताया जा रहा है.हालांकि इसकी पुष्टि अभी खुलकर तो नहीं हुई है,लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी पर यदि विश्वास करें तो भाजपा के दूसरे नेता जों टिकट के दावेदार है वह भी वर्तमान विधायक के खिलाफ है और यदि उन्हें टिकट नहीं मिलता है तो वह अंदरखाने सूर्यकान्त धस्माना से हाथ मिला सकतें है. यदि यह नाराजगी चुनाव तक बनी रहती है तो इसका सीधा असर भाजपा के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है.
पंचायत चुनावों में विधायक दिलीप रावत और उनके परिजनों से जुड़े राजनीतिक समीकरणों को मिली चुनौती को भी विपक्ष अपने पक्ष में माहौल बनने के संकेत के तौर पर देख रहा है.

जनहित के मुद्दों पर लगातार सक्रिय धस्माना

सूर्यकांत धस्माना लंबे समय से जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार और सत्ता पक्ष के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं.उपनल कर्मचारियों के समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर जों आंदोलन और संघर्ष किया उनके समर्थकों का दावा है कि इस लड़ाई से हजारों बेरोजगारों और संविदा कर्मियों को इसका लाभ मिला.
इसके अलावा लैंसडाउन क्षेत्र से देहरादून और एम्स ऋषिकेश में उपचार के लिए आने वाले जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों की मदद में भी धस्माना सबसे आगे रहते है.जरूरतमंदों को उपचार संबंधी सहायता दिलाने के साथ हीं आर्थिक मदद करने में भी सूर्यकान्त धस्माना सबसे आगे रहते है.

दिलीप रावत पर आरोप भी बने मुद्दा

विधायक दिलीप रावत पर राजनीतिक विरोधियों की ओर से समय-समय पर ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं.हालांकि इन आरोपों पर विधायक पक्ष का अपना रुख रहा है और आरोपों को राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताया जाता रहा है.लेकिन कांग्रेस नें यदि सूर्यकान्त धस्माना पर विश्वास जताया तो वह इस मुद्दे कों चुनावों में हवा दे सकतें है,क्योंकि खुद लैंसडाउन विधानसभा के ठाकुर वोटर भी नहीं चाहते है कि जाति के आधार पर नेता जनता में फूट डालें.पुराने चुनावी समीकरणों पर यदि नजर डालें तो लैंसडाउन विधानसभा के ब्राह्मण और ठाकुर वोटरों नें कभी भी जाति बिरादरी के आधार पर वोट नहीं दिया,लेकिन भाजपा का मौजूदा विधायक से नाराज चल रहा एक धडा इस बात कों तूल देनें में लगा है कि विधायक समर्थक कुछ लोग ब्राह्मणों कों सोशल मीडिया में अपने निशाने पर लें रहें है.


क्या इस बार बदलेगा लैंसडाउन का समीकरण?

कुल मिलाकर, अगर कांग्रेस यदि सूर्यकांत धस्माना को लैंसडाउन से मैदान में उतारती है तो लगातार तीन बार से जीत रहे भाजपा विधायक दिलीप रावत के सामने एक अनुभवी और मजबूत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी खड़ा होगा.
धस्माना की संभावित एंट्री ने लैंसडाउन की सियासत में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है.अब बड़ा सवाल यही है—क्या कांग्रेस का यह सियासी दांव भाजपा के मजबूत किले में सेंध लगा पाएगा?