सेवा और संघर्ष की मिसाल सावित्री देवी नहीं रहीं,बेटियों की शिक्षा और समाजसेवा के लिए समर्पित रहा जीवन

समाजसेवा की मिसाल सावित्री देवी का निधन, 69 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

उत्तराखंड राज्य आंदोलन से लेकर महिला सशक्तिकरण तक निभाई अहम भूमिका, सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

देहरादून/हरिद्वार। समाजसेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली इंजीनियर गोपाल दत्त रतूड़ी की धर्मपत्नी सावित्री देवी का 69 वर्ष की आयु में निधन हो गया.उनके निधन से परिवार, रिश्तेदारों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्र में शोक की लहर है.सावित्री देवी पिछले कुछ दिनों से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रही थीं और देहरादून के जॉली ग्रांट अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था.
सावित्री देवी पुजार गांव निवासी मां चंद्रबदनी के पुजारी एवं प्रसिद्ध समाजसेवी रामेश्वर प्रसाद भट्ट की सबसे बड़ी बेटी थीं.उन्होंने अपना पूरा जीवन समाजसेवा, महिला सशक्तिकरण और बेटियों की शिक्षा के लिए समर्पित किया.उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौर में भी उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ को बनाया जीवन का संकल्प

सावित्री देवी मात्र एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं थी,बल्कि मातृशक्ति की जीवंत मिसाल थीं.उन्होंने जीवनभर बेटियों की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी.उनका मानना था कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब बेटियों को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर मिलें.
देवप्रयाग विधानसभा के सिंगोली गांव के मूल निवासी इंजीनियर गोपाल दत्त रतूड़ी की धर्मपत्नी सावित्री देवी ने समाजसेवा के क्षेत्र में ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी लौ आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देती रहेगी उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्य और उनके आदर्श लंबे समय तक लोगों के बीच याद किए जाएंगे.

खड़खड़ी श्मशान घाट पर नम आंखों से दी अंतिम विदाई

सोमवार को हरिद्वार स्थित खड़खड़ी श्मशान घाट पर सावित्री देवी के पार्थिव शरीर का पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.इस दौरान अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए.परिवारजनों, रिश्तेदारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी.उनके पुत्र इशांक रतूड़ी ने मुखाग्नि दी.सावित्री देवी अपने पीछे चार बेटियों और एक बेटे सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं.

समाजसेवा के साथी रहे गोपाल दत्त रतूड़ी

सावित्री देवी के पति इंजीनियर गोपाल दत्त रतूड़ी उत्तराखंड जल संस्थान में महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं.सेवानिवृत्ति के बाद भी वह लगातार सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं सावित्री देवी ने भी जीवनभर उनके साथ सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.गोपाल दत्त रतूड़ी की सामाजिक कार्यो में बढ़ती हिस्सेदारी कों देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें पेयजल विभाग के ओएसडी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गईं.जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ निभाया और इस दौरान उनकी पत्नी सावित्री देवी भी उनके सामाजिक कार्यो में हमेशा उनके साथ ख़डी रहती थी.

सावित्री देवी के निधन पर राजनेताओं और समाजसेवियों नें किया गहरा शोक व्यक्त

सावित्री देवी के निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व मंत्री प्रसाद नैथानी, श्री बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना,उत्तराखंड की पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी,उत्तराखंड के पूर्व DGP अनिल रतूड़ी,निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर ललितानंद जी महाराज, पूर्व पेयजल मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, उत्तराखंड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष पंडित राजेंद्र अंथवाल, वरिष्ठ पत्रकार इंद्र भूषण बडोनी, वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु बडोनी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने गहरा दुख व्यक्त किया.
सभी ने कहा कि सावित्री देवी का निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है.उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि एक महिला परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

शरीर भले ही साथ नहीं, विचार हमेशा जिंदा रहेंगे

सावित्री देवी आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ, महिला सम्मान और समाजसेवा के लिए उनके संघर्ष और विचार हमेशा जीवित रहेंगे। समाजसेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा जलाई गई उम्मीद और सेवा की लौ आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी.