हिमालय की संजीवनी बनेगा यमकेश्वर !हर्बल कुम्भ में औषधीय सम्पदा के संरक्षण पर मंथन

यमकेश्वर (पौड़ी)। उत्तराखंड के यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के मालागांव स्थित हर्बल वर्ल्ड हिमालय (श्री धन्वंतरि धाम) में आयोजित हर्बल कुंभ 2026 के दूसरे दिन धार्मिक, आयुर्वेदिक और औषधीय विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई.कार्यक्रम में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत करते हुए हिमालय की दुर्लभ वनौषधियों के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक शोध को समय की आवश्यकता बताया.
कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी तथा लघु उद्योग मंत्री भरत चौधरी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए.इस दौरान अतिथियों ने आयुर्वेद, जड़ी-बूटी संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे.

हेमंत द्विवेदी ने की धन्वंतरि धाम की पहल की सराहना

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने हर्बल वर्ल्ड हिमालय एवं श्री धन्वंतरि धाम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यमकेश्वर जैसे प्राकृतिक संपदा से समृद्ध क्षेत्र में हर्बल कुंभ का आयोजन विशेष महत्व रखता है.ऐसे आयोजन हिमालय की प्राकृतिक एवं औषधीय संपदा को नई पहचान देने के साथ ही आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
उन्होंने कहा कि हिमालय की जैव विविधता और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान हमारी अमूल्य धरोहर हैं.इनके संरक्षण के साथ वैज्ञानिक पद्धति से अध्ययन और शोध को प्रोत्साहित करना जरूरी है.इससे जड़ी-बूटियों के औषधीय उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं, किसानों तथा महिला समूहों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे.

यमकेश्वर की वन संपदा में रोजगार की अपार संभावनाएं

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र, विशेषकर यमकेश्वर की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियां और प्राकृतिक वातावरण विभिन्न दुर्लभ एवं बहुमूल्य औषधीय पौधों के लिए महत्वपूर्ण हैं.संजीवनी बूटी सहित अनेक वनौषधियों की पहचान, उपयोगिता और औषधीय महत्व को लेकर शोध कार्य किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि वनौषधियों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक उपयोग से यमकेश्वर क्षेत्र को आयुर्वेद एवं हर्बल उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर जड़ी-बूटियों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी जा सकती है.

आचार्य बालकृष्ण ने किया अतिथियों का स्वागत

इससे पूर्व पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष एवं कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कार्यक्रम में पहुंचे विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए.अतिथियों ने आयुर्वेद, जड़ी-बूटी संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जुड़े पतंजलि योगपीठ एवं महिला समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन भी किया.
हर्बल कुंभ के माध्यम से यमकेश्वर क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाओं को सामने लाने का प्रयास किया गया.
इस अवसर पर भरत लाल, राकेश कुकरेती, अमन कुकरेती, धर्मानंद बिजल्वाण, विनोद जुगराण सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे.