दिल्ली..दुनिया के सबसे बड़े देश रूस में तख्ता-पलट की कोशिश की गई. रूस की ओर से यूक्रेन में लड़ाई लड़ने वाले वैगनर ग्रुप (Wagner Amry) ने रूसी सत्ता के खिलाफ ही विद्रोह कर दिया. वैगनर आर्मी के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन ने अपने हजारों लड़ाकों के साथ कल, 24 जून को रूस की राजधानी मॉस्को की ओर कूच किया. वैगनर आर्मी वही मिलिट्री ग्रुप है, जिन्हें भाड़े के सैनिक कहा जाता है. अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, वैगनर ग्रुप के प्रिगोझिन ‘काफी समय’ से हथियारों और गोला-बारूद सहित रूस के नेतृत्व को चुनौती देने की योजना बना रहे थे. हालांकि, तख्ता-पलट की ये कोशिश अब नाकाम कर दी गई है. और, प्रिगोझिन के रूस से भागने की खबरें आ रही हैं.
येवगेनी प्रिगोझिन के पुतिन से बगावत करने और रूस में तख्तापलट की कोशिश को विदेश मामलों के जानकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बड़ी घटना मान रहे हैं, क्योंकि येवगेनी प्रिगोझिन की वैगनर आर्मी के पास हजारों लड़ाके हैं, और अब तक वे रूस और यूक्रेन की जंग में रूसी सत्ता का साथ दे रहे थे. वैगनर के लड़ाकों ने यूक्रेन के कई शहरों पर कब्जा करने में कामयाबी पाई थी. हालांकि, बीते रोज वैगनर की ओर से जब ये दावा किया गया कि वे रूसी सत्ता के खिलाफ लड़ेंगे, तो रूस में तहलका मच गया. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि वैगनर ने कल रूस के दो शहरों पर कब्जा भी कर लिया. ये शहर राजधानी मॉस्को से 360 किमी दूर थे
रूस में पहले भी हो चुकी हैं तख्ता-पलट की कोशिश
बता दें कि रूस में इससे पहले भी तख्ता-पलट की कई बार कोशिशें हो चुकी हैं. वहां 1989 में बर्लिन वॉल गिरने के बाद दो बार तख्तापलट की कोशिश की गई. दरअसल, 1989 में बर्लिन की दीवार गिराए जाने के पीछे वजह यही थी कि सोवियत संघ (यूएसएसआर) कमजोर हो रहा था. उसमें शामिल 15 गणराज्य अपनी आजादी मांग रहे थे. तब तत्कालीन राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव को तख्तापलट की कोशिश का सामना करना पड़ा. 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया, और रूस से अलग 14 देश और बन गए.
रूस की तरह इन देशों में भी बगावत
रूस के अलावा दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जहां एक छोटे-से सैन्य समूह द्वारा सहसा की गयी कार्रवाई द्वारा किसी सरकार को असंवैधानिक तरीके से हटाकर नयी असैनिक या सैनिक सरकार बना ली गई. पाकिस्तान में तख्तापलट का लंबा इतिहास रहा है, और यही वजह है कि वहां बरसों तक मुल्क की बागडोर सेना के हाथों में रही. मुशर्रफ तख्तापलट करके ही खुद सत्ता में आ गए थे और राष्ट्रपति बन गए थे.
पाकिस्तान के मित्र देश तुर्किये (तुर्की) में भी बीते सालों में तख्ता पलट की कोशिश हुई थी, जिसे नाकाम कर दिया गया था. ऐसा ही मिस्र में भी हुआ था. मिस्र का तख्तापलट 3 जुलाई 2013 को हुआ था. मिस्र के सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतेह अल-सिसी ने मिस्र के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से हटा दिया.





