कोटद्वार नगर निगम की दुर्दशा,चुनावी साल में बनेगा बड़ा मुद्दा

उत्तराखंड में इस साल कें नवम्बर माह में होंने वालें निकाय चुनाव की चुनावी विसात धीरे धीरे बिछने लगी हैँ. प्रदेश कें नवसृजित निगमों में सें एक कोटद्वार नगर निगम कों लेकर भी चुनावी हलचल तेज होंने लगी हैँ. वर्तमान में कोटद्वार निगम में मेयर पद पर कांग्रेस का कब्जा हैँ लेकिन इस बार कें चुनावों में कांग्रेस की राह इतनी आसान नहीं हैँ.भारतीय जनता पार्टी का संगठन निकाय चुनावों कों लेकर लगातार संगठन स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा हैँ लेकिन कांग्रेस की कोटद्वार की निकाय चुनाव की चुनावी सुई फिर सें पूर्व मंत्री एवं कांग्रेसी दिग्गज सुरेन्द्र सिंह नेगी कें आस पास ही घूम रहीं हैँ. कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी कें कार्यकाल की कोटद्वार में एक साल की विफलताओं कों लेकर हालांकि सड़कों पर उतर तों आई हैँ लेकिन अपने कुनबे कों बचा पाना उसकें सामने भी बड़ी चुनौती हैँ. 2022 कें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कों कोटद्वार में आसान लग रहीं जीत सें अभी भी सबक लेनें की जरुरत है कि कैसे पार्टी कें चुनावी जयचंदों नें आसान लग रहीं जीत कों हार में तब्दील करनें कें लिए विरोधियो सें हाथ मिला दिया था. 2022 कें विधानसभा चुनावों में यदि जबरदस्त भीतरघात नहीँ हुआ होता तों आज कोटद्वार विधानसभा का प्रतिनिधित्व सुरेंद्र सिंह नेगी कर रहें होतें. खुद सुरेंद्र सिंह नेगी नें भी सपने में नहीं सोचा होगा कि कोटद्वार में उन्हें एक ऐसी हार कें लिए विवश होना पड़ेगा जों चुनाव सें दो दिन पहलें तक एकतरफ़ा जीत की ओर बढ़ रहीं थी.लेकिन अफ़सोस सम्मान जनक हार तों दूर की बात कांग्रेस प्रत्याशी नेगी कों ऐसी हार कें लिए कोटद्वार में विवश होना पड़ा जिसनें उनके राजनीतिक कैरियर पर भी संशय कें बादल खड़े कर दिए.भारतीय जनता पार्टी कें नेता कोटद्वार नगर निगम की मेयर कें कार्यकाल की विफलताओं कों लेकर कई बार हल्ला बोल चुके है लेकिन इस बात सें भी वह इंकार नहीं कर सकतें हैँ कि प्रदेश में पिछले 6 सालों सें उनकी सरकार हैँ और इस दौरान दूसरें निगमों कें सापेक्ष कोटद्वार निगम कों कितना पैसा विकास कार्यो कें लिए उनकी सरकार में आवंटित हुआ.दलगत राजनीति सें ऊपर उठकर यदि काम हुआ होता तों फिर आज कोटद्वार निगम शहर कें विकास कें लिए पैसे का रोना नहीं रों रहा होता.

कोटद्वार नगर निगम की दुर्दशा कें लिए भाजपा और कांग्रेस में कौन हैँ जिम्मेदार

भाजपा और कांग्रेस कें बीच आपसी खींचतान का सबसे बड़ा खामिजाया उस आम आदमी कों भुगतना पड़ा जों आज भी नगर निगम कें मायनें समझने की कोशिशों में जुटा हैँ. 40 वार्डो कें नगर निगम कें किसी भी वार्ड की जनता आज निगम कें कामों सें संतुष्ट नहीं हैँ,इसके लिए न केवल कांग्रेस की मेयर जिम्मेदार हैँ बल्कि भारतीय जनता पार्टी कें स्थानीय जन प्रतिनिधि भी उतने ही जिम्मेदार हैँ जिन्होंने कभी निगम कीं सुध नहीँ ली. हरक सिंह रावत भारतीय जनता पार्टी सें कोटद्वार सें विधायक और सरकार में पावरफुल मंत्री रहें लेकिन उनका भी रवैया कोटद्वार नगर निगम कें प्रति हमेशा उदासीन हीं बना रहा, उनके बाद ऋतु खंडूडी भूषण जों विधानसभा अध्यक्ष भी हैँ वह कोटद्वार सें विधायक चुनी गईं लेकिन उनका भी एक साल का कार्यकाल कोटद्वार नगर निगम कें विकास कें हिसाब सें ठीक नहीं रहा, अलबता उनके कार्यकाल में एक अंग्रेजी शराब की दुकान कों लेकर राजनीतिक लड़ाई कानूनी लड़ाई तक जरूर जा पहुंची.कुल मिलाकर यदि देखा जाए तों सफलताओं और विफलताओं की इस लड़ाई में अब दोनों आमने सामने हैँ.कांग्रेस भाजपा पर निगम कें विकास में सहयोग नहीं करने का आरोप लगा रहीं है तों भाजपा कांग्रेस पर सरकार सें सहयोग नहीं लेनें का आरोप लगा रही हैँ.

कोटद्वार नगर निगम कें मेयर पर कों लेकर दावेदारों की फौज आने लगी सामनें

इस बीच आगामी नगर निगम कें चुनावों कों लेकर मेयर पद पर कई दावेदार भी सामने आने लगें हैँ. भाजपा और कांग्रेस कें आधा दर्जन स्थानीय नेता अभी सें अपनी दावेदारी पार्टी और सोशल मीडिया स्तर पर जतानें लगें हैँ. लेकिन इन दावेदारों में कुछ ऐसे भी हैँ जों ज़मीनों की अवैध खरीद फरोख्त, अवैध खनन, अवैध शराब कें साथ ही दूसरें कालें कारोबार में संलिप्त हैँ ऐसे में राष्ट्रीय पार्टीयां क्या ऐसे लोगों या फिर उनके करीबियों पर अपना विश्वास जतायेगी इसको लेकर चर्चाओं का दौर जारी हैँ.