सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई में स्पष्ट करते हुए कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की चयन की प्रक्रिया (कॉलेजियम के फैसले) सूचना के अधिकार आरटीआई और न्यायिक समीक्षा के बाहर है.जजों की चयन प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा भी नहीं की जा सकती है.
बेंच ने कहा कि कॉलेजियम का फैसला उसकी अपनी समझ और संतुष्टि पर आधारित होता है और न तो हाई कोर्ट और न ही सुप्रीम कोर्ट किसी उम्मीदवार की सिफारिश को लेकर याचिकाएं सुनकर या निर्देश जारी करके उसमें कोई कमी निकाल सकते हैं.
हम कोई ऐसी स्थिति नहीं पैदा करना चाहते हैं जिससे नई-नई मुश्किलें खड़ी हों
बेंच ने कहा कि हम कॉलेजियम के फैसलों में दखल नहीं देंगे. बेंच ने यह भी बताया कि कुछ उम्मीदवारों को चुनने और उनके नामों की सिफारिश करने से पहले सैकड़ों उम्मीदवारों को बातचीत के लिए बुलाया जाता है.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी.जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी योग्यता को नजरअंदाज कर उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया है लेकिन उन्हें प्रमोशन नहीं दिया गया.सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए साफ-साफ कहा कि हम अब कोई नई मुश्किलें खड़ी नहीं करना चाहते हैं.कॉलेजियम के फैसले न्यायिक समीक्षा के बाहर है और हम इसपर विचार नहीं कर सकते है.
अरविंद मल्होत्रा के वकील ने हिमाचल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पर लगाए थे आरोप
अरविंद मल्होत्रा के वकील बलबीर सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितंबर, 2024 के अपने फैसले में हिमाचल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के उस एकतरफा फैसले को गलत बताया था, जिसमें मल्होत्रा समेत दो सीनियर ज्यूडिशियल अफसरों की उम्मीदवारी को नजरअंदाज किया गया था.कोर्ट ने कहा था कि सिलेक्शन कॉलेजियम को मिलकर करना चाहिए, न कि CJI को अकेले.सिंह ने कहा कि कॉलेजियम ने मल्होत्रा की उम्मीदवारी और उनके जवाबों पर विचार नहीं किया.
बेंच ने कहा कि कॉलेजियम का फैसला उसकी अपनी समझ और संतुष्टि पर आधारित होता है और न तो हाई कोर्ट और न ही सुप्रीम कोर्ट किसी उम्मीदवार की सिफ़ारिश को लेकर याचिकाएं सुनकर या निर्देश जारी करके उस पर सवाल उठा सकते हैं.संवैधानिक अदालतों में जजों की नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों के सिलेक्शन का मामला न तो न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है और न ही RTI एक्ट के तहत आता है.






