दिल्ली! ड्रोन और यूएवी हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल ने दुनिया भर की सेनाओं के लिए हवाई रक्षा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है.ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि कम लागत वाले, छोटे ड्रोनों के बड़े पैमाने पर होने वाले हमलों को कैसे रोका जाए?अब पाकिस्तान की एयर फ़ोर्स अपनी कम दूरी की हवाई रक्षा (शॉर्ट-रेंज एयर डिफ़ेंस सिस्टम यानी एसएचओआरएडी) को मज़बूत करने के लिए चीन और तुर्की की मदद ले रही है.
इनमें मिसाइलें, ऑटोमैटिक तोपें और ड्रोन-रोधी तकनीक शामिल हैं
पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स की ओर से सात सितंबर को जारी किए गए वीडियो में तीन अलग-अलग वायु रक्षा प्रणालियां दिखाई गई हैं. ये हैं –
1. चीन में बनी एचक्यू-17एई कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
2. तुर्की की एसेलसन कोरकुट 35 मिमी ऑटोमैटिक एयर डिफ़ेंस गन सिस्टम
3.तुर्की का ही एसेलसन साहिन 40 मिमी काउंटर-ड्रोन सिस्टम
ये सभी सिस्टम मिलकर एक एकीकृत रक्षा कवच बनाती हैं.
इसका मक़सद अहम सैन्य प्रतिष्ठानों को ड्रोन, यूएवी हथियारों, हेलीकॉप्टर, क्रूज़ मिसाइल और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों सहित अलग-अलग हवाई ख़तरों से बचाना है.
ये सभी सिस्टम मिलकर एक एकीकृत रक्षा कवच बनाती हैं. इसका मक़सद अहम सैन्य प्रतिष्ठानों को ड्रोन, यूएवी हथियारों, हेलीकॉप्टर, क्रूज़ मिसाइल और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों सहित अलग-अलग हवाई ख़तरों से बचाना है.




