कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला का VRS का ऐलान,वन विभाग में बड़ी हलचल

उत्तराखंड | देहरादून | 24 अक्टूबर 2026 | हिमांशु बडोनी

उत्तराखंड के वन विभाग से एक बड़ी खबर सामने आई है.कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने भारतीय वन सेवा (IFS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का ऐलान किया है. उनके इस फैसले से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हलचल मच गई है.डॉ. बडोला ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने निर्णय की जानकारी साझा करते हुए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है.हालांकि, उनके इस फैसले के पीछे की कोई विशिष्ट वजह सामने नहीं आई है.
पौड़ी जिले के कोटद्वार के मूल निवासी डॉ. साकेत बडोला वर्ष 2008 बैच के उत्तराखंड कैडर के IFS अधिकारी हैं.वन सेवा में आने से पहले वह पशु चिकित्सक के रूप में कार्य कर चुके हैं.वन्यजीव संरक्षण, संरक्षित वन क्षेत्रों के प्रबंधन और अवैध वन्यजीव व्यापार की रोकथाम से जुड़े कार्य उनके सेवाकाल के प्रमुख हिस्से रहे हैं.

2009 में प्रशिक्षु DFO से शुरू हुआ सफर

डॉ. साकेत बडोला का वन विभाग में सफर वर्ष 2009 में तराई पश्चिमी वन प्रभाग में प्रशिक्षु उप वन संरक्षक (DFO) के रूप में शुरू हुआ.इसके बाद उन्होंने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में उपनिदेशक की जिम्मेदारी संभाली.आगे चलकर उन्हें वन्यजीवों की तस्करी रोकने के लिए गठित TRAFFIC India से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व भी मिले.इसके बाद उन्होंने राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक के रूप में काम किया.
जुलाई 2024 में राजाजी टाइगर रिजर्व से स्थानांतरित होकर उन्होंने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक का कार्यभार संभाला.वर्ष 2025 में उन्हें मुख्य वन संरक्षक (CCF) पद पर पदोन्नति भी मिली.इस प्रकार उनका सेवाकाल वन प्रशासन से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों तक फैला रहा.

वन्यजीव तस्करी रोकने से लेकर संरक्षण तक अहम भूमिका

डॉ.साकेत बडोला के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव TRAFFIC India में उनकी जिम्मेदारी रही.यह संस्था वन्यजीवों के अवैध व्यापार पर निगरानी रखने और इससे जुड़ी चुनौतियों पर काम करती है.इस भूमिका ने उन्हें संरक्षित वन क्षेत्रों के प्रबंधन से आगे बढ़कर वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और संरक्षण से जुड़े व्यापक प्रयासों में काम करने का अवसर दिया.राजाजी और कॉर्बेट जैसे महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्व में जिम्मेदारी संभालने के दौरान उनका कार्य वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और जंगलों के आसपास रहने वाले समुदायों से जुड़ी चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने से भी संबंधित रहा.

कॉर्बेट में साहित्य महोत्सव की पहल भी चर्चा में

डॉ. साकेत बडोला की हालिया पहलों में कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन भी शामिल है.6 से 8 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण को केवल बाघों और जंगल सफारी तक सीमित न रखते हुए साहित्य, प्रकृति, हिमालयी विरासत और स्थानीय समुदायों के साथ जोड़ना था.इस पहल के माध्यम से प्रकृति लेखकों, संरक्षण विशेषज्ञों, फिल्मकारों और स्थानीय लोगों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों पर संवाद का मंच देने का प्रयास किया गया.

सोशल मीडिया पर क्या बोले डॉ. बडोला?

अपने संदेश में डॉ. बडोला ने कहा कि कई महीनों के गंभीर चिंतन के बाद उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से भारतीय वन सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का निर्णय किया है.उन्होंने उत्तराखंड के पौड़ी जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर अखिल भारतीय सेवा में पहुंचने को अपने लिए सपने के सच होने जैसा बताया.
उन्होंने अपने सेवाकाल में जनता की सेवा करने, प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण में योगदान देने और देश की जमीनी चुनौतियों को समझने के अवसरों के प्रति आभार जताया.साथ ही, उन्होंने अपने सहकर्मियों, वन विभाग के कर्मचारियों, परिवार, मित्रों और आम जनता के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया.उन्होंने भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण में योगदान देते रहने की उम्मीद जताई.

डॉ साकेत बडोला की भविष्य की राहें

डॉ. साकेत बडोला के VRS के ऐलान के बाद अब सबकी नजर शासन के अगले कदम पर है.फिलहाल उनके सार्वजनिक बयान में व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख है, लेकिन किसी खास वजह की पुष्टि नहीं की गई है.
यह भी महत्वपूर्ण है कि VRS लेने की घोषणा और सरकार की ओर से उसका औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं.इसलिए उनकी सेवानिवृत्ति को अंतिम रूप से मंजूर माना जाना अभी उचित नहीं होगा.
कोटद्वार से निकलकर भारतीय वन सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले डॉ. बडोला के इस फैसले ने वन विभाग में नई चर्चा शुरू कर दी है.आने वाले दिनों में शासन की प्रतिक्रिया और उनके कार्यभार को लेकर होने वाले फैसलों पर सभी की नजर रहेगी.