बद्रीनाथ धाम पर मंडराया बर्फीले कहर का साया,बर्फ से तबाही की आशंका,वैज्ञानिकों नें किया अलर्ट

उत्तराखंड | विशेष रिपोर्ट!हिमांशु बडोनी

उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री बदरीनाथ धाम को लेकर एक चिंताजनक वैज्ञानिक अध्ययन सामने आया है.हिमालय की ऊंची चोटियों पर मौजूद लटकते ग्लेशियर (हैंगिंग ग्लेशियर) बदरीनाथ धाम और आसपास के क्षेत्र के लिए बड़े हिमस्खलन का संभावित खतरा बन सकते हैं.वैज्ञानिकों की इस रिपोर्ट ने धाम की सुरक्षा, श्रद्धालुओं की जान-माल और स्थानीय आबादी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तथा ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों ने बदरीनाथ के ऊपर मौजूद तीन हैंगिंग ग्लेशियरों का अध्ययन किया है.यह शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल Landslides में 28 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुआ.

280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ सकता है बर्फीला सैलाब!

अध्ययन के अनुसार बदरीनाथ क्षेत्र के ऊपर 4,700 से 5,465 मीटर की ऊंचाई पर तीन बड़े हैंगिंग ग्लेशियरों का आकलन किया गया.इनमें से एक ग्लेशियर को संभावित खतरे के लिहाज से सबसे संवेदनशील पाया गया है.इसकी ढलान लगभग 34.57 डिग्री बताई गई है.
वैज्ञानिकों के कंप्यूटर सिमुलेशन के मुताबिक, इस ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने की स्थिति में बर्फीले मलबे का प्रवाह लगभग 78.5 मीटर प्रति सेकंड यानी करीब 283 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार तक पहुंच सकता है.यह एक संभावित आपदा पर आधारित मॉडल है, न कि ग्लेशियर के तत्काल टूटने की भविष्यवाणी.

398 भवन और महत्वपूर्ण सुविधाएं भी संभावित खतरे की जद में

शोध के सबसे चिंताजनक पहलू में बताया गया है कि सबसे खराब संभावित परिदृश्य में हिमस्खलन से बदरीनाथ क्षेत्र के लगभग 398 भवन, 2.66 किलोमीटर सड़क, दो पुल, एक हेलीपैड और पार्किंग क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं.
यह आकलन बताता है कि खतरा केवल प्राकृतिक पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि तीर्थयात्रियों, स्थानीय निवासियों और धाम की आधारभूत सुविधाओं की सुरक्षा से भी जुड़ा है.

मंदिर को सीधे नुकसान की आशंका नहीं, लेकिन मलबा बन सकता है चुनौती

अध्ययन में एक महत्वपूर्ण बात यह भी कही गई है कि इस विशेष मॉडल के अनुसार बदरीनाथ मंदिर के सीधे हिमस्खलन की चपेट में आने की आशंका नहीं जताई गई है.हालांकि, इस तरह की घटना में चट्टानों और मलबे का जमाव मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है.

सरकार और प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती

वैज्ञानिकों ने संभावित हिमस्खलन क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित बफर जोन निर्धारित करने, निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और संवेदनशील क्षेत्रों में नए निर्माण को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है.
बदरीनाथ धाम में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.ऐसे में वैज्ञानिक अध्ययन को गंभीरता से लेते हुए आपदा प्रबंधन, समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना महत्वपूर्ण है.

BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का बयान भी आया सामने

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी नें इस वैज्ञानिक रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देतें हुए कहा कि इस रिपोर्ट का अध्यन किया जा रहा हैं और उसके बाद श्री बद्रीनाथ ज़ी के मंदिर और उसके परिसर कों लेकर सुरक्षा के क्या कुछ कदम उठाए जा सकतें हैं उसकों लेकर सरकार से जल्द चर्चा की जाएगी.हेमंत द्विवेदी नें कहा कि बदरीनाथ धाम और आसपास के क्षेत्र में संभावित हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए समय रहते एक व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की क़र ली जाएगी ताकि वैज्ञानिकों की चेतावनी कों मद्देनजर रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा सकें