उत्तराखंड, कोटद्वार
निकाय चुनाव सें ठीक पहलें कोटद्वार में पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी की बढ़ी सक्रियता सें पूर्व विधायक शैलेन्द्र सिंह रावत की रातों की नींद उड़ गई हैँ. कोटद्वार विधानसभा में फिर सें अपनी राजनीतिक संभावनाओं कों तलाश रहें शैलेन्द्र सिंह रावत कोटद्वार की सक्रिय राजनीति सें भले ही पिछलें 12 सालों सें बाहर हों लेकिन निकाय चुनाव कें जरिए वह फिर सें कोटद्वार में अपनी राजनीतिक जड़े जमाने की कोशिशों में जुटे हैँ.
उधर दूसरी ओर पूर्व विधायक शैलेन्द्र सिंह रावत की कोटद्वार में राजनीतिक संभावनाओं की भनक लगते ही पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी अपने दल बल कें साथ कोटद्वार की समस्याओं कों लेकर सड़कों पर उतर आए हैँ.दरसअल कांग्रेसी दिग्गज सुरेन्द्र सिंह नेगी कभी नहीं चाहेंगे कि 2027 विधानसभा चुनाव में क़ोई भी कांग्रेस पार्टी सें उनके राजनीतिक प्रतिद्वन्दी कें रूप में उनके सामने खड़ा हों. 2027 का विधानसभा चुनाव संभवता पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी कें राजनीतिक जीवन का आखिरी विधानसभा चुनाव हों क्योँकि बढ़ती उम्र और कोटद्वार की राजनीति में कम होती उनकी साख उनके लिए मुश्किलें ख़डी कर रहीं हैँ.
इस साल कें आखिर में होंने वालें निकाय चुनाव में पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी कांग्रेस सें ऐसे प्रत्याशी कों मेयर पद पर टिकट दिलाने की पैरवी करेंगे जों उनके लिए 2027 की चुनावी राहों में अड़चन पैदा न करें. पूर्व विधायक शैलेन्द्र सिंह रावत कों कोटद्वार की राजनीति में फिर सें स्थापित करने की उनके समर्थक कोशिश तों कर रहें हैँ लेकिन इन कोशिशों का रास्ता पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह रावत कें घर सें होकर गुजरता हैँ.कोटद्वार विधानसभा में पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी लगातार दों विधानसभा चुनाव भले ही हार गए हों लेकिन आज भी कोटद्वार में उनकी राजनीतिक ज़मीन सबसे अधिक मजबूत हैँ. कोटद्वार में कांग्रेस यदि आज थोड़ा बहुत भी ज़िंदा हैँ तों वह सुरेन्द्र सिंह नेगी और उन कांग्रेसियों की वजह सें ज़िंदा हैँ जों कांग्रेस की रीति नीति में विश्वास करते हैँ.
विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाली यमकेश्वर विधानसभा में लगातार दों चुनाव हारने कें बाद पूर्व विधायक शैलेन्द्र सिंह रावत भी अब समझ गए होंगे कि यमकेश्वर विधानसभा में जितनी मेहनत उन्होंने इन 10 सालों में की इतनी मेहनत यदि कोटद्वार विधानसभा में की होती तों आज वह कोटद्वार की राजनीति में स्थापित हों चुके होते. लेकिन राजनीति जीवन में उनके द्वारा लिए गए एक गलत फैसलें नें उन्हें कोटद्वार की सक्रिय राजनीति सें बाहर कर दिया,जिसके कारण कोटद्वार में उनके समर्थकों कों मजबूरन दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ा.खैर पुरानी राजनीतिक गलतियों कों पीछे छोड़ते हुए शैलेन्द्र सिंह रावत फिर सें अपनी राजनीतिक संभावनाओं कों कोटद्वार में तलाश रहें हैँ और इस बार कें निकाय चुनाव में मेयर पद पर दबी जुबान सें अपनी दावेदारी जता रहें हैँ. कोटद्वार की राजनीति सें अपने राजनीतिक वनबास कों खत्म करनें में जुटे कांग्रेस नेता शैलेन्द्र सिंह रावत कें पास यह आखरी मौका हैँ जों उन्हें मेयर कें रूप में दिखाई दें रहा हैँ, लेकिन इस मौकें कें लिए पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी का राजनीतिक आशीर्वाद भी शैलेन्द्र सिंह रावत कें लिए उतना ही जरुरी हैँ जितना उनके लिए मेयर का टिकट.
इस साल कें आखिर में होंने वालें निकाय चुनाव कें लिए पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी नें सड़कों पर चुनावी बिगुल फूँक दिया हैँ, कोटद्वार की छोटी बड़ी समस्याओं कों लेकर नेगी लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहें हैँ.भाजपा विधायक ऋतु भूषण खंडूडी की एक साल कें कार्यकाल की नाकामी कों लेकर सुरेन्द्र सिंह नेगी लगातार हमलावर हैँ लेकिन शैलेन्द्र सिंह रावत कों मेयर बनाने का अरमान पालें उनके समर्थक इस प्रदर्शन सें कोसों दूर हैँ. कुल मिलाकर यदि देखा जाए तों बिना पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी कें राजनीतिक आशीर्वाद कें पूर्व विधायक शैलेन्द्र सिंह रावत का मेयर बनने का सपना साकार नहीं हों सकता.अब पूर्व मंत्री नेगी अपने लिए भविष्य की राजनीतिक बाधाओं और सम्भावनाओं कें बीच कितना तालमेल बिठा पातें हैँ यह उनकी राजनीतिक सोच पर निर्भर करेंगा.





