यमकेश्वर विधानसभा में भाजपा के मजबूत चेंहरे के रूप में उभरे हेमंत द्विवेदी,संगठन से लेकर सत्ता के गलियारों में हो रही चर्चा

यमकेश्वर में भाजपा का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे हेमंत द्विवेदी, संगठन से सत्ता के गलियारों तक मजबूत पकड़

यमकेश्वर. वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर यमकेश्वर में भाजपा के संभावित चेहरों को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं.इन चर्चाओं में भाजपा के वरिष्ठ नेता और श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का नाम लगातार मजबूत दावेदार के रूप में सामने आता दिखाई दे रहा है.
द्विवेदी के पक्ष में सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू उनका संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्र से जुड़ाव और देहरादून से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक राजनीतिक-संगठनात्मक संपर्क माना जा रहा है. हालांकि 2027 के टिकट को लेकर भाजपा ने अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं किया है,लेकिन जिस तरह यमकेश्वर में हेमंत द्विवेदी सक्रिय है उससे लग रहा है कि वह भाजपा के 2027 के विधानसभा का यमकेश्वर में चेहरा बन सकतें है.

बीकेटीसी अध्यक्ष की जिम्मेदारी बनी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि

हेमंत द्विवेदी को वर्ष 2025 में श्री बदरी-केदार मंदिर समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया.यह जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका राजनीतिक कद प्रदेश स्तर पर तो बढ़ा ही साथ ही देश दुनिया में भी उनका राजनीतिक कद काफ़ी ऊँचा हुआ है.मुख्यमंत्री आवास पर बीकेटीसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने से लेकर राज्यपाल से मुलाकात तक उनके सार्वजनिक संपर्क लगातार सामने आते रहें हैं.इस बीच यमकेश्वर से उनका जुड़ाव भी लगातार दिखाई देता रहा है.जनवरी 2026 में उन्होंने यमकेश्वर के प्रसिद्ध गेंद मेले में शिरकत की और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत तथा पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करतें हुए आने वाले सालों में इसे और भव्य बनाने की बांट कहीं.

संगठन में सक्रिय भूमिका और क्षेत्रीय पकड़

हेमंत द्विवेदी लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं.वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी अनिल बलूनी के चुनाव अभियान में सह-प्रभारी की भूमिका में भी देखा गया था,इस दौरान उन्होंने कोटद्वार,लैंसडाउन और यमकेश्वर विधानसभा में अपने कुशल राजनीतिक अनुभव के बल पर उन्हें यहां से निर्णायक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई.और यही
यही वजह है कि भाजपा नेताओं और समर्थकों का मानना है कि द्विवेदी केवल राजनीतिक पद पर रहने वाले नेता नहीं, बल्कि संगठन और चुनावी मैदानी राजनीति की समझ रखने वाला चेहरा भी हैं.

दिल्ली से देहरादून तक मजबूत पकड़

द्विवेदी की राजनीतिक ताकत का एक प्रमुख आधार उनके समर्थकों द्वारा बताई जाने वाली देहरादून से दिल्ली तक की मजबूत राजनीतिक पहुंच है.राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार और संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ ही भाजपा के केंद्रीय नेताओं और संगठन में उनकी सार्वजनिक गतिविधियां उनके व्यापक राजनीतिक संपर्क का संकेत देती हैं.

यमकेश्वर के लिए स्थानीय चेहरा होने का फायदा

यमकेश्वर की राजनीति में स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय पहचान का महत्व काफी अधिक है.हेमंत द्विवेदी का मूल जुड़ाव यमकेश्वर क्षेत्र से होने के कारण समर्थक उन्हें स्थानीय और संगठनात्मक—दोनों समीकरणों को साधने वाला चेहरा बताते हैं.मूल रुप से खोबरा गांव के निवासी हेमंत द्विवेदी ने मई 2026 में यमकेश्वर के बिथ्याणी स्थित राजकीय महाविद्यालय में अपने निजी सहयोग से शैक्षणिक सभागार का निर्माण भी कराया था,जिसका शिलान्यास खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था.

2027 में टिकट की दौड़ कितनी मजबूत?

यमकेश्वर में भाजपा के सामने 2027 में सबसे बड़ी चुनौती मजबूत उम्मीदवार का चयन होगी. ऐसे में हेमंत द्विवेदी का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनके पास क्षेत्रीय पहचान, भाजपा संगठन का अनुभव, सरकार से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और व्यापक राजनीतिक संपर्क—इन चारों का संयोजन दिखाई देता है.
फिलहाल इसे भाजपा की ओर से टिकट की घोषणा नहीं माना जा सकता. लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जरूर तेज है कि यदि भाजपा 2027 में यमकेश्वर से किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगाती है जो संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर प्रभाव रखता हो, तो हेमंत द्विवेदी मजबूत विकल्पों में शामिल हो सकते हैं.
यमकेश्वर की सियासत में अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि भाजपा किसे टिकट देगी, बल्कि यह भी है कि क्या पार्टी 2027 में हेमंत द्विवेदी के बढ़ते राजनीतिक कद को चुनावी मैदान में उतारेगी?