भक्तिभाव और तन्मयता से किया श्री हनुमान चालीसा एकादश पाठ का रसास्वादन।

प्रयागराज,यूपी। ‘ज्ञान गुण सागर वाहिनी’ के तत्वाधान में राम बाग़ समीप स्थित हनुमान मंदिर के प्रांगण में शनिवार शाम श्री हनुमान चालीसा एकादश पाठ श्रृंखला का 11वां आयोजन संपन्न हुआ।


वाहिनी’ के अध्यक्ष कुश श्रीवास्तव के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों के साथ भाजपा महानगर के विशिष्ठ पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भक्तिभाव और तन्मयता से श्री हनुमान चालीसा एकादश पाठ का रसास्वादन किया।
प्रसाद वितरण के उपरान्त कुश श्रीवास्तव ने वहां उपस्थित लोगों से संवाद में श्री हनुमान चालीसा के एकादश पाठ श्रृंखला के विषय में अपनी परिकल्पना साझा करते हुए कहा कि हमनें ‘ज्ञान गुण सागर वाहिनी’ के माध्यम से समाज में धार्मिक एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रादुर्भाव करने के उद्देश्य से और हमारी सनातन व्यवस्था एवं परंपराओं में निहित गतिविधियों के पुनर्जागरण के लिए एकादश पाठ श्रृंखला की परिकल्पना की।


ज्ञान गुण सागर वाहिनी’ अपने आप में राष्ट्रवाद, आध्यात्म, और संस्कृति का अनूठा संगम है। वाहिनी ने सर्वजन में सत्संग की भावना को पुनर्जागृत करने एवं बच्चों में बजरंगबली के प्रति रुझान बढ़ाने की दृष्टि से प्रतिदिन प्रयास करने का संकल्प उठाया है।


इसी क्रम में आगे बताते हुए कुश श्रीवास्तव ने कहा कि अभी कर्नाटक में विगत दिनों में कर्नाटक कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में उल्लिखित बजरंग दल के विषय की कठोर निंदा एवं भर्त्सना की और कहा की हनुमान जी के उपासकों के लिए ऐसी दुर्भावना रखना अत्यंत निंदनीय है।
आगे उल्लेख करते हुए कुश श्रीवास्तव ने कहा की इस तरह की विचारधारा को उत्पत्ति देने के किसी भी प्रयास को निरस्त, ध्वस्त करने हेतु ही अब उनकी संस्था ‘ज्ञान गुण सागर वाहिनी’ हनुमान जी की उपासना एवं सत्संग के लिए और बड़ा संकल्प लेती है, जिसका नाम ‘ज्ञान गुण सागर प्रतियोगिता’ होगा।


उन्होंने कहा कि हमारी वाहिनी इस बात पर कार्य करने बढ़ रही है क्यूंकि आज बच्चों में एवं युवाओं में प्रतियोगिता के माध्यम से एक मनोरंजन होता है और इसके विपरीत इंटरनेट, डिजिटल इत्यादि माध्यमों के कारण तमाम ध्यान भटकाने वाले आकर्षणों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता है। और यदि वाहिनी बच्चों और युवाओं को हनुमान जी के प्रति जागृत करती रहेगी तो हनुमान जी से प्रेरित होकर लोग अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा एवं सद्विचारों का प्रादुर्भाव कर सकते हैं।


इस तरह के आयोजनों से जनमानस में धर्म के प्रति भी निष्ठापूर्ण आचरण एवं व्यवहार की पृष्ठभूमि तैयार होगी जिससे एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण सम्भव होगा। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को और प्रचलित करने का आह्वान करते हुए इस प्रयोजन में ज्ञान गुण सागर वाहिनी के सहयोग का वचन दिया। बुद्धिजीवियों का धन्यवाद देते हुए यह आग्रह किया कि यथाशक्ति धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता बढ़ाएं।

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