नेपाल में कुदरत का कहर :हिमनद टूटने से आई जलप्रलय,सैकड़ों लोगों की मौत,400 से अधिक लापता,बिहार और यूपी में हाईअलर्ट

नेपाल में कुदरत का कहर: हिमनद टूटने से आई जलप्रलय, 157 मौतें, 403 लापता; 341 विदेशी नागरिकों का पता नहीं

काठमांडू/देहरादून। नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त की सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी. अचानक आई बाढ़ में नेपाल में अब तक 157 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 403 लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं.लापता लोगों में 341 विदेशी नागरिक शामिल हैं.इनमें 133 भारतीय नागरिक भी हैं,जबकि इस भीषण आपदा में नेपाली सेना के कुछ जवान भी लापता बताए जा रहें हैं.

आखिर कहां से आई इतनी विनाशकारी बाढ़?

बाढ़ का सबसे भयावह असर नेपाल के रसुवा जिले में देखा गया. तिब्बत सीमा के पास ल्हेन्दे खोला नदी में अचानक भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा गिरा, जिसके बाद पानी का सैलाब भोटेकोशी नदी में पहुंच गया.देखते ही देखते नदी का जलस्तर खतरनाक तरीके से बढ़ गया और पानी-मलबे की दीवार ने रास्ते में आने वाले गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया.
विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती तौर पर भूकंप को संभावित कारण माना गया था, लेकिन बाद के विश्लेषण में सामने आया कि जिस झटके को 4.4 तीव्रता का भूकंप समझा गया, वह वास्तव में बड़े पैमाने पर हिमनद, बर्फ और चट्टानों के टूटकर गिरने से पैदा हुई भूकंपीय ऊर्जा हो सकती है. वैज्ञानिकों ने इसे आइस-रॉक एवलॉन्च/ग्लेशियल घटना से जुड़ी आपदा बताया है.

157 मौतें, 403 लापता—कितने पर्यटक?

नेपाल पुलिस के मुताबिक अब तक 157 मौतों की पुष्टि हुई है.वहीं 403 लोग लापता हैं.इनमें 341 विदेशी नागरिक हैं.लापता लोगों में नेपाली सेना के कुछ जवान भी बताए जा रहें हैं.नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार लापता विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय, 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक शामिल हैं.
लापता लोगों में बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं और रसुवा क्षेत्र में ट्रैकिंग कर रहे पर्यटकों की है.इसलिए मृतकों में कितने पर्यटक हैं, इसका अलग से आधिकारिक आंकड़ा अभी जारी नहीं हुआ है। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक/विश्वसनीय आंकड़ा लापता पर्यटकों और विदेशी नागरिकों का है.

कौन-कौन से नेपाली जिले प्रभावित?

सबसे ज्यादा तबाही रसुवा जिले में हुई.इसके अलावा बाढ़ का असर नुवाकोट और धादिंग तक पहुंचा.भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र के किनारे बसे इलाकों में मकान, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़क बाढ़ में बह गई या क्षतिग्रस्त हुई है. कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है.

नेपाली सेना ने संभाला मोर्चा

आपदा के बाद नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू क़र दिया हैं.हेलीकॉप्टरों के जरिए फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है.रसुवा के स्याफ्रूबेसी और तिमुरे जैसे इलाकों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, जहां पानी, मलबे और क्षतिग्रस्त ढांचे के कारण हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग तक मुश्किल हो रही है.

भारत ने दिया मदद का भरोसा

नेपाल की मदद के लिए भारत आगे आया है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत कर हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिलाया हैं.भारत की ओर से कहा गया है कि राहत और बचाव अभियान में नेपाल के साथ करीबी समन्वय किया जा रहा है.
भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री भी भेजी है और नेपाल में फंसे भारतीयों की जानकारी जुटाने के लिए भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन जारी की है.

भारत में किस राज्य पर असर का खतरा?

नेपाल से निकलने वाली नदियों का पानी भारत में आने के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश को हाई अलर्ट पर रखा गया है. खासकर गंडक/नारायणी नदी तंत्र को लेकर चिंता है.बिहार में प्रशासन ने छह जिलों से करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है और जरूरत पड़ने पर 10,000 से 12,000 लोगों को और निकालने की तैयारी है.
बिहार में विशेष निगरानी वाले जिलों में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली शामिल हैं.उत्तर प्रदेश में महराजगंज और कुशीनगर जैसे गंडक नदी से जुड़े जिलों पर निगरानी रखी जा रही है.फिलहाल उत्तर प्रदेश में बड़ा खतरा नहीं बताया गया है, लेकिन प्रशासन सतर्क है.

आंकड़ों में नेपाल की जलप्रलय

.नेपाल में मौतें: 157
.कुल लापता: 403
.लापता विदेशी नागरिक: 341
.लापता भारतीय: 133
.अमेरिकी लापता: 47
.ऑस्ट्रेलियाई लापता: 34
.ब्रिटिश लापता: 33
.कनाडाई लापता: 24
.क्षतिग्रस्त/बह गए पुल: कम से कम 19
.क्षतिग्रस्त सड़क: करीब 40 किलोमीटर
भारत में बिहार से सुरक्षित निकाले गए लोग: करीब 5,000
बिहार में संभावित कुल निकासी की तैयारी: 10,000–12,000 लोग
हालात अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं हैं. राहत और बचाव अभियान जारी है तथा लापता लोगों की संख्या और मृतकों का आंकड़ा आने वाले घंटों में बढ़ सकता है.नेपाल के पर्वतीय इलाकों में मलबे और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण राहत दलों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है.